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तमिल वर्ष 2017

तमिल त्योहार 2017

नई दिल्ली, दिल्ली, भारत · 12 चांद्र मास
नई दिल्ली, दिल्ली, भारत बदलें

2017 में तमिल कैलेंडर के अनुसार 180 त्योहार और व्रत-पर्व आते हैं। प्रमुख उत्सवों में शामिल हैं: पोंगल, गणतंत्र दिवस, होली, स्वतंत्रता दिवस, शरद नवरात्रि। वैदिक पंचांग में नए हैं? देखें यह कैसे काम करता है।

समय प्रारूप

2017 के तमिल महीने

महीना शुरू समाप्त दिन महीना
Margazhi 16 दिस॰ 2016 13 जन॰ 2017 29 दिसंबर 2016 देखें
Thai 14 जन॰ 2017 12 फ़र॰ 2017 30 जनवरी देखें
Maasi 13 फ़र॰ 2017 13 मार्च 2017 29 फ़रवरी देखें
Panguni 14 मार्च 2017 13 अप्रैल 2017 31 मार्च देखें
Chithirai 14 अप्रैल 2017 14 मई 2017 31 अप्रैल देखें
Vaikasi 15 मई 2017 14 जून 2017 31 मई देखें
Aani 15 जून 2017 15 जुल॰ 2017 31 जून देखें
Aadi 16 जुल॰ 2017 16 अग॰ 2017 32 जुलाई देखें
Aavani 17 अग॰ 2017 16 सित॰ 2017 31 अगस्त देखें
Purattasi 17 सित॰ 2017 16 अक्तू॰ 2017 30 सितंबर देखें
Aippasi 17 अक्तू॰ 2017 15 नव॰ 2017 30 अक्तूबर देखें
Karthigai 16 नव॰ 2017 15 दिस॰ 2017 30 नवंबर देखें
Margazhi 16 दिस॰ 2017 13 जन॰ 2018 29 दिसंबर देखें
साल, महीने दर महीने
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Thai
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Maasi
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मार्च

Panguni
04

अप्रैल

Chithirai
05

मई

Vaikasi
06

जून

Aani
07

जुलाई

Aadi
08

अगस्त

Aadi
09

सितंबर

Aavani
10

अक्टूबर

Purattasi
अक्तू॰5
देवी लक्ष्मी, भगवान कृष्ण
अक्तू॰17
धनतेरस मुख्य
भगवान धन्वंतरि, देवी लक्ष्मी
अक्तू॰19
दीपावली मुख्य
देवी लक्ष्मी
अक्तू॰21
यमराज, यमुना
अक्तू॰30
भगवान कृष्ण
11

नवंबर

Aippasi
12

दिसंबर

Margazhi

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कौन-से तमिल त्योहार हर वर्ष एक ही ग्रेगोरियन तिथि पर आते हैं?
सौर-आँके हुए तमिल त्योहार सूर्य की राशि-संक्रान्ति से बँधे हैं, इसलिए ग्रेगोरियन कैलेंडर पर एक-दो दिन के भीतर दोहराते हैं। पुथांडु (तमिल नव वर्ष) हमेशा चित्तिरै 1 — 14 अप्रैल को आता है। पोंगल हमेशा थाई 1 — 14 जनवरी को (कभी-कभी 15 जनवरी)। आडि पेरुक्कु हमेशा आडि 18 — लगभग 3-4 अगस्त को। ये तीनों सौर-आधारित हैं, इसलिए स्थिर हैं। नक्षत्र-आँके त्योहार प्रतिवर्ष बदलते हैं: वैकासि विशाखम, वैकुण्ठ एकादशी, कार्तिगै दीपम, थाई पूसम, माशि मकम और पंगुनि उत्तिरम — ये सब उस वर्ष चन्द्रमा की नक्षत्र-स्थिति पर निर्भर हैं, इसलिए ग्रेगोरियन तिथि में दो सप्ताह तक का अन्तर हो सकता है।
आडि पेरुक्कु क्या है और यह आडि 18 को क्यों मनाया जाता है?
आडि पेरुक्कु — पूरा नाम 'आडि पत्तिनेट्टाम पेरुक्कु' — तमिल सौर माह आडि के 18वें दिन, लगभग 3-4 अगस्त को मनाया जाता है। 'पेरुक्कु' का अर्थ है उफान या वृद्धि, और यह त्योहार तमिल नदियों — कावेरी, वैगई और ताम्रपर्णी — के मानसूनी उफान का उत्सव है। भक्त नदी-तटों पर पूजा करते हैं, जल-देवता को अर्पण चढ़ाते हैं। तमिल महिलाएँ नए वस्त्र पहनती हैं, नव-धान्य चावल (नौ अनाजों का मिश्रण) पकाती हैं और नदी-तट पर जाती हैं। प्रमुख आयोजन-स्थल हैं तिरुचिरापल्ली और कुम्भकोणम के कावेरी घाट, मदुरै के वैगई तट। यह त्योहार तमिल परम्परा में विशिष्ट है — तेलुगू या कन्नड़ कैलेंडर में इसका सीधा समकक्ष नहीं है, हालाँकि तेलंगाना का बोनालू त्योहार भी मानसून-काल की देवी-पूजा की समान भावना रखता है।
मार्गझि का मद्रास म्यूजिक सीज़न तमिल कैलेंडर से कैसे जुड़ा है?
मद्रास म्यूजिक सीज़न जानबूझकर मार्गझि की भक्ति-तीव्रता के साथ संरेखित है। दिसम्बर-जनवरी के पूरे तमिल माह मार्गझि में मायलापुर, त्रिप्लिकेन, टी नगर और अलवारपेट के कर्नाटक संगीत-सभाओं में सैकड़ों संगीत कार्यक्रम होते हैं। यह सीजन प्रभावतः कर्नाटक संगीत का वार्षिक उत्सव है। मार्गझि से इसका सम्बन्ध धार्मिक है: शास्त्रीय कर्नाटक संगीत भक्ति-आन्दोलन और मंदिर-संगीत-परम्परा से विकसित हुआ है, और मार्गझि में भक्ति-ऊर्जा सर्वोच्च होती है। मंदिर संगीत-सत्र, दिव्यप्रबन्धम-पाठ और सभा-प्रदर्शन सभी इसी खिड़की में होते हैं। मार्गझि में वैकुण्ठ एकादशी — श्रीरंगम का परमपद वासल उद्घाटन — तमिल वैष्णव वर्ष की सबसे बड़ी भीड़ का दिन है।
तमिल और तेलुगू/कन्नड़ कैलेंडर में क्या अन्तर है?
तीनों कैलेंडर एक ही साठ-वर्षीय नाम-चक्र का उपयोग करते हैं, लाहिरी अयनांश अपनाते हैं, और सौर-चन्द्र दोनों तत्वों को मिलाते हैं — परन्तु माह-नामकरण पद्धति अलग है। तमिल सौर मासों का उपयोग करता है: चित्तिरै से पंगुनि, जो सूर्य की राशि से नामित हैं। तेलुगू और कन्नड़ चन्द्र मासों का उपयोग करते हैं: चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद, आश्विन, कार्तिक, मार्गशीर्ष, पौष, माघ, फाल्गुन — वही नाम जो हिन्दू अमान्त कैलेंडर में हैं। तेलुगू और कन्नड़ नव वर्ष (उगादि/युगादि) चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को — मार्च-अप्रैल में चन्द्र-नव-चन्द्र पर — आता है। तमिल पुथांडु चित्तिरै 1 पर — मेष संक्रान्ति, 14 अप्रैल को — जो एक भिन्न खगोलीय आधार है।
2026 में इस वर्ष को विश्वावसु क्यों कहते हैं?
तमिल वर्ष साठ संस्कृत नामों के चक्र में चलते हैं — प्रभव, विभव, शुक्ल, प्रमोद, प्रजापति, अंगिरस, श्रीमुख, भव, युव, धातृ … और आगे क्षय तक, फिर प्रभव से पुनः। विश्वावसु इस क्रम में बयालीसवाँ नाम है। 2026-2027 का तमिल वर्ष विश्वावसु इसलिए है क्योंकि चक्र में अभी यही नाम है; यह 14 अप्रैल 2026 को मेष संक्रान्ति पर आरम्भ हुआ और 14 अप्रैल 2027 को समाप्त होगा। अगला वर्ष परभव (तैंतालीसवाँ) होगा। इससे पहले विश्वावसु 1965-1966 में था; अगला विश्वावसु 2086-2087 में होगा। यह साठ-वर्षीय चक्र विक्रम संवत से सर्वथा भिन्न है, जो सतत संख्या में गिना जाता है।
2026 में कार्तिगै दीपम कब है और तिरुवण्णामलै में क्या होता है?
कार्तिगै दीपम तमिल माह कार्तिगै में कृत्तिका नक्षत्र वाले दिन पड़ता है — पूर्णिमा के निकट, सामान्यतः नवम्बर के अन्त या दिसम्बर में। 2026 में यह नवम्बर के अन्त में है। तमिलनाडु भर में परिवार सन्ध्या काल में मिट्टी की विलक्कु (दीपक) की पंक्तियाँ घर के आगे सजाते हैं। तिरुवण्णामलै में अरुणाचल पर्वत की चोटी पर महादीपम प्रज्वलित होता है — वह विशाल अग्नि-ज्योति जो कृत्तिका नक्षत्र की पूर्णिमा की रात दूर-दूर से दिखती है। श्रद्धालु पर्वत की 14 किमी की गिरिवलम (परिक्रमा) रातभर करते हैं। तिरुवण्णामलै का कार्तिगै दीपम दीपावली से अलग है (दीपावली कार्तिका अमावस्या पर, एक माह पहले होती है): यहाँ शिव का अनन्त ज्योतिर्लिंग-स्वरूप मनाया जाता है। चिदम्बरम और तिरुवण्णामलै के मंदिरों में इस दिन विशेष दीपोत्सव होता है।