होली
Lord Krishna
यह कब पड़ता है
तिथि बदलती है क्योंकि यह चंद्रमा का अनुसरण करती है, ग्रेगोरियन कैलेंडर का नहीं।
भारत (IST) के लिए सटीक पंचांग गणना। दूर पूर्व या पश्चिम के स्थानों पर तिथि एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।
Holi
महत्व और कथा
होली सर्दियों के अंत और वसंत के आरंभ का प्रतीक है, जब खेत नई फसलों से लहलहा उठते हैं और ठंड आखिरकार विदा लेती है। यह दो रातों और दिनों में मनाई जाती है: फाल्गुन की पूर्णिमा की शाम होलिका दहन की अलाव, और अगली सुबह रंगों का उल्लास, जिसे रंगवाली होली या धुलंडी कहते हैं।
अलाव अपने साथ प्राचीन कथा समेटे है। हिरण्यकशिपु, एक राजा जो स्वयं को ईश्वर मानकर पूजे जाने की माँग करता था, अपने पुत्र प्रह्लाद को विष्णु की भक्ति से नहीं डिगा सका। उसकी बहन होलिका, जिसे अग्नि से अभय का वरदान प्राप्त था, बालक को गोद में लेकर उसे मारने के लिए आग में बैठ गई — परंतु जल गई होलिका और अनहित निकल आया प्रह्लाद। होलिका दहन की अलाव उसी रात को दोहराती है: एक सीधा-सा स्मरण कि अहंकार स्वयं ही भस्म हो जाता है और अटल आस्था उससे बच निकलती है।
रंगों का दिन कृष्ण और राधा का है। प्रचलित कथा के अनुसार, बाल कृष्ण, साँवले रंग के और इस पर सकुचाते हुए, अपनी माता से पूछते हैं कि राधा इतनी गोरी क्यों है — और उन्हें हँसी-मज़ाक में कहा जाता है कि वे राधा के मुख पर जो चाहें रंग लगा दें। यहीं से रंग लगाना स्नेह और समानता का भाव बन गया: होली के दिन जाति, उम्र और हैसियत की सारी रेखाएँ मिटा दी जाती हैं, और कोई भी किसी को भी रंग सकता है। यह वर्ष का वह एक दिन है जो ऊँच-नीच के बजाय समानता पर रचा गया है।
अनुष्ठान एवं परंपरा
होली अपने दो दिनों में कैसे मनाई जाती है:
- पूर्णिमा की शाम, संध्या काल में एक सामुदायिक अलाव जलाई जाती है — होलिका दहन। लोग उसके चारों ओर एकत्र होते हैं, अन्न और नारियल अर्पित करते हैं, और अग्नि की परिक्रमा करते हैं; इसका समय प्रदोष काल के अनुसार होता है, जब पूर्णिमा तिथि विद्यमान हो और अशुभ भद्रा काल बीत चुका हो।
- अगली सुबह रंगवाली होली होती है: सूखा रंग (गुलाल) और रंगीन पानी गली-गली, आँगन और घरों में खुलकर खेला जाता है, जिसमें उम्र या हैसियत की परवाह किए बिना सब शामिल होते हैं।
- मिठाइयाँ इस दिन का केंद्र होती हैं, सबसे बढ़कर गुजिया — खोया और मेवों से भरी तली हुई मिठाई — साथ ही नमकीन पकवान और कहीं-कहीं पारंपरिक ठंडाई।
- मिलना-जुलना भी इस उत्सव का अंग है: लोग घर-घर जाकर मित्रों और संबंधियों को रंग लगाते हैं, पुराने झगड़े सुलझाते हैं, और भोजन बाँटते हैं।
- मथुरा और वृंदावन के आसपास के ब्रज क्षेत्र में — कृष्ण की जन्मभूमि — होली कई अतिरिक्त दिनों तक मनाई जाती है, जिसमें बरसाना की प्रसिद्ध लठमार होली भी शामिल है।
क्षेत्रीय विविधताएँ
यह तिथि कैसे निर्धारित होती है
Observed on the full-moon day (Purnima) of Phalguna (Shukla paksha), reckoned by dusk (pradosh kala). Should the tithi fall across two days, tradition keeps the earlier day (purva-viddha).
तिथियाँ NASA/JPL की खगोलीय गणना से निकाली जाती हैं और पारंपरिक पंचांग के अनुरूप होती हैं।