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गुरु गोचर 2031

2031 में गुरु क्या करता है: कब राशि और नक्षत्र बदलता है, कब वक्री होता है, और कब सूर्य से अस्त होता है। हर तिथि वास्तविक है — जनवरी से पहले शुरू हुई अवधि वैसा ही बताती है।

गुरु — वर्ष दर वर्ष

गुरु इस वर्ष 3 बार राशि बदलता है

गुरु पूरे 2031 एक ही राशि में नहीं रहता — नीचे दी तिथियाँ उसके वास्तविक प्रवेश और निर्गम की हैं, कैलेंडर की नहीं।

राशि परिवर्तन
3
नक्षत्र परिवर्तन
4
दिशा परिवर्तन
2
अस्त काल
1

गुरु — राशि दर राशि

  • वृश्चिक 23 सितंबर 2030 → 17 फरवरी 2031 (पहले शुरू) पुनः प्रवेश
  • धनु 17 फरवरी 2031 → 14 जून 2031
  • वृश्चिक 14 जून 2031 → 15 अक्टूबर 2031 पुनः प्रवेश
  • धनु 15 अक्टूबर 2031 → 5 मार्च 2032 (आगे भी जारी) पुनः प्रवेश

2031 में क्या होता है

  • 15 अप्रैल 2031 वक्री होता है — धनु 4.7°
  • 16 अगस्त 2031 मार्गी होता है — वृश्चिक 24.8°
  • 18 दिसंबर 2031 गुरु 15 जनवरी 2032 तक अस्त रहता है सूर्य से 11° के भीतर — शास्त्रीय जन्मकालीन कक्षा। अस्त ग्रह के फल इस अवधि में रुके रहते हैं।

स्तंभन तिथियाँ IST में हैं। स्तंभन एक क्षण होता है, इसलिए दूसरे समय-क्षेत्र के स्रोत इसे एक दिन आगे-पीछे दिखा सकते हैं।

नक्षत्रों में गुरु

राशि लंबा अध्याय है। नक्षत्र उसके भीतर का छोटा हिस्सा है, और उसका अपना स्वामी ग्रह होता है — यही गोचर का स्वभाव बदलता है।

नक्षत्र स्वामी से तक अवधि
ज्येष्ठा बुध 12 दिसंबर 2030 17 फरवरी 2031 2.2 माह
मूला केतु 17 फरवरी 2031 14 जून 2031 3.8 माह
ज्येष्ठा बुध 14 जून 2031 15 अक्टूबर 2031 4.1 माह पुनः प्रवेश
मूला केतु 15 अक्टूबर 2031 20 दिसंबर 2031 2.2 माह पुनः प्रवेश
पूर्वाषाढ़ा शुक्र 20 दिसंबर 2031 17 फरवरी 2032 1.9 माह

वक्री होने पर ग्रह नक्षत्र की सीमा दोबारा पार करता है, इसलिए एक ही नक्षत्र एक से अधिक बार दिख सकता है। ऐसी पंक्तियाँ पुनः प्रवेश के रूप में चिह्नित हैं।