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गुरु गोचर 2026

2026 में गुरु क्या करता है: कब राशि और नक्षत्र बदलता है, कब वक्री होता है, और कब सूर्य से अस्त होता है। हर तिथि वास्तविक है — जनवरी से पहले शुरू हुई अवधि वैसा ही बताती है।

गुरु — वर्ष दर वर्ष

गुरु इस वर्ष दो बार राशि बदलता है

गुरु पूरे 2026 एक ही राशि में नहीं रहता — नीचे दी तिथियाँ उसके वास्तविक प्रवेश और निर्गम की हैं, कैलेंडर की नहीं।

राशि परिवर्तन
2
नक्षत्र परिवर्तन
3
दिशा परिवर्तन
2
अस्त काल
1

गुरु — राशि दर राशि

  • मिथुन 5 दिसंबर 2025 → 2 जून 2026 (पहले शुरू) पुनः प्रवेश
  • कर्क 2 जून 2026 → 31 अक्टूबर 2026 पुनः प्रवेश
  • सिंह 31 अक्टूबर 2026 → 25 जनवरी 2027 (आगे भी जारी)

2026 में क्या होता है

  • 11 मार्च 2026 मार्गी होता है — मिथुन 20.9°
  • 13 दिसंबर 2026 वक्री होता है — सिंह 2.8°
  • 14 जुलाई 2026 गुरु 13 अगस्त 2026 तक अस्त रहता है सूर्य से 11° के भीतर — शास्त्रीय जन्मकालीन कक्षा। अस्त ग्रह के फल इस अवधि में रुके रहते हैं।

स्तंभन तिथियाँ IST में हैं। स्तंभन एक क्षण होता है, इसलिए दूसरे समय-क्षेत्र के स्रोत इसे एक दिन आगे-पीछे दिखा सकते हैं।

नक्षत्रों में गुरु

राशि लंबा अध्याय है। नक्षत्र उसके भीतर का छोटा हिस्सा है, और उसका अपना स्वामी ग्रह होता है — यही गोचर का स्वभाव बदलता है।

नक्षत्र स्वामी से तक अवधि
पुनर्वसु गुरु 13 अगस्त 2025 18 जून 2026 10.2 माह
पुष्य शनि 18 जून 2026 19 अगस्त 2026 2 माह अभी
आश्लेषा बुध 19 अगस्त 2026 31 अक्टूबर 2026 2.4 माह
मघा केतु 31 अक्टूबर 2026 25 जनवरी 2027 2.8 माह

वक्री होने पर ग्रह नक्षत्र की सीमा दोबारा पार करता है, इसलिए एक ही नक्षत्र एक से अधिक बार दिख सकता है। ऐसी पंक्तियाँ पुनः प्रवेश के रूप में चिह्नित हैं।