गुरु गोचर 2030
2030 में गुरु क्या करता है: कब राशि और नक्षत्र बदलता है, कब वक्री होता है, और कब सूर्य से अस्त होता है। हर तिथि वास्तविक है — जनवरी से पहले शुरू हुई अवधि वैसा ही बताती है।
गुरु — वर्ष दर वर्ष
गुरु इस वर्ष 3 बार राशि बदलता है
गुरु पूरे 2030 एक ही राशि में नहीं रहता — नीचे दी तिथियाँ उसके वास्तविक प्रवेश और निर्गम की हैं, कैलेंडर की नहीं।
- राशि परिवर्तन
- 3
- नक्षत्र परिवर्तन
- 4
- दिशा परिवर्तन
- 2
- अस्त काल
- 1
गुरु — राशि दर राशि
- तुला 25 अगस्त 2029 → 25 जनवरी 2030 (पहले शुरू) पुनः प्रवेश
- वृश्चिक 25 जनवरी 2030 → 1 मई 2030
- तुला 1 मई 2030 → 23 सितंबर 2030 पुनः प्रवेश
- वृश्चिक 23 सितंबर 2030 → 17 फरवरी 2031 (आगे भी जारी) पुनः प्रवेश
2030 में क्या होता है
- 13 मार्च 2030 वक्री होता है — वृश्चिक 3.3°
- 15 जुलाई 2030 मार्गी होता है — तुला 23.5°
- 16 नवंबर 2030 गुरु 14 दिसंबर 2030 तक अस्त रहता है सूर्य से 11° के भीतर — शास्त्रीय जन्मकालीन कक्षा। अस्त ग्रह के फल इस अवधि में रुके रहते हैं।
स्तंभन तिथियाँ IST में हैं। स्तंभन एक क्षण होता है, इसलिए दूसरे समय-क्षेत्र के स्रोत इसे एक दिन आगे-पीछे दिखा सकते हैं।
नक्षत्रों में गुरु
राशि लंबा अध्याय है। नक्षत्र उसके भीतर का छोटा हिस्सा है, और उसका अपना स्वामी ग्रह होता है — यही गोचर का स्वभाव बदलता है।
| नक्षत्र | स्वामी | से | तक | अवधि | |
|---|---|---|---|---|---|
| विशाखा | गुरु | 29 नवंबर 2029 | 10 मार्च 2030 | 3.3 माह | |
| अनुराधा | शनि | 10 मार्च 2030 | 17 मार्च 2030 | 0.2 माह | |
| विशाखा | गुरु | 17 मार्च 2030 | 11 अक्टूबर 2030 | 6.8 माह | पुनः प्रवेश |
| अनुराधा | शनि | 11 अक्टूबर 2030 | 12 दिसंबर 2030 | 2 माह | पुनः प्रवेश |
| ज्येष्ठा | बुध | 12 दिसंबर 2030 | 17 फरवरी 2031 | 2.2 माह |
वक्री होने पर ग्रह नक्षत्र की सीमा दोबारा पार करता है, इसलिए एक ही नक्षत्र एक से अधिक बार दिख सकता है। ऐसी पंक्तियाँ पुनः प्रवेश के रूप में चिह्नित हैं।