बल विश्लेषण

षड्बल (छह प्रकार की शक्ति) गणना जो प्रत्येक ग्रह की शक्ति दर्शाती है।

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षड्बल (ग्रह शक्ति) क्या है?

षड्बल ('छह प्रकार का बल') जन्म कुण्डली में प्रत्येक ग्रह की शक्ति मापने की व्यापक प्रणाली है। यह प्रत्येक ग्रह का छह विशिष्ट श्रेणियों में मूल्यांकन करके उन्हें रूपा में कुल अंक प्रदान करता है। निर्धारित सीमा से ऊपर के ग्रह अपने प्रतिश्रुत फल देते हैं; नीचे के ग्रह कठिनाई अनुभव कर सकते हैं।

षड्बल साधारण गरिमा मूल्यांकन से परे जाता है। यह प्रत्येक ग्रह की वास्तविक शक्ति का सबसे सटीक चित्र प्रस्तुत करने के लिए स्थान, दिशा, काल, चेष्टा, नैसर्गिक और दृष्टि बल का समावेश करता है।

षड्बल की गणना कैसे होती है?

प्रत्येक घटक विशिष्ट सूत्रों का उपयोग करता है। स्थानबल राशि और वर्ग स्थानों का मूल्यांकन करता है। दिग्बल केन्द्र भावों की स्थिति नापता है। कालबल जन्म समय को सम्मिलित करता है। चेष्टाबल ग्रह की गति और वक्री अवस्था का आकलन करता है।

व्यक्तिगत अंकों का योग कुल रूपा मान बनता है। प्रत्येक ग्रह की न्यूनतम आवश्यक शक्ति निर्धारित है। वास्तविक और आवश्यक का अनुपात प्रभावशीलता दर्शाता है। 50% से अधिक वाले ग्रह अत्यन्त बलवान हैं; 80% से कम वाले ग्रहों को उपचार की आवश्यकता हो सकती है।

बल के छह स्रोत

स्थानबल (स्थिति आधारित)

राशि स्थान से प्राप्त बल, जिसमें ग्रह की गरिमा (उच्च, मूलत्रिकोण, स्वराशि आदि), भाव स्थिति और वर्गीय चार्ट शामिल हैं। प्रायः यह सबसे बड़ा घटक होता है।

दिग्बल (दिशा आधारित)

केन्द्र भावों में स्थिति से प्राप्त बल। गुरु/बुध को पूर्व (प्रथम भाव), सूर्य/मंगल को दक्षिण (दशम भाव), शनि को पश्चिम (सप्तम भाव), चन्द्र/शुक्र को उत्तर (चतुर्थ भाव) में बल मिलता है।

कालबल (समय आधारित)

जन्म समय से प्राप्त बल — दिन और रात्रि जन्म में भिन्न ग्रह बलवान होते हैं। इसमें होरा स्वामी, वार स्वामी और ग्रह युद्ध भी सम्मिलित हैं।

चेष्टाबल (गति आधारित)

ग्रह की गति से प्राप्त बल — वक्री और स्थिर ग्रहों को अतिरिक्त चेष्टाबल प्राप्त होता है। तीव्र गति वाले ग्रह भी अंक अर्जित करते हैं।

नैसर्गिक बल (प्राकृतिक)

प्रकाशमानता पर आधारित स्वाभाविक बल। क्रम: सूर्य, चन्द्र, शुक्र, गुरु, बुध, मंगल, शनि। यह सभी जातकों के लिए समान रहता है।

दृक्बल (दृष्टि आधारित)

दृष्टियों से प्राप्त या खोया गया बल। शुभ दृष्टि (गुरु, शुक्र) इसे बढ़ाती है; पाप दृष्टि (शनि, मंगल) इसे घटाती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ऐतिहासिक उत्पत्ति

षड्बल को महर्षि पराशर ने बृहत् पराशर होरा शास्त्र में 2,000 वर्ष से भी पहले व्यवस्थित किया था। छह घटकों का यह ढाँचा खगोलीय गणनाओं को ज्योतिषीय सिद्धान्तों के साथ मिलाने वाला एक अत्यन्त परिष्कृत मात्रात्मक दृष्टिकोण है।

आधुनिक सॉफ़्टवेयर कार्यान्वयन स्विस एफ़ेमेरिस की परिशुद्धता का उपयोग करते हुए पराशर के मूल सूत्रों को निष्ठापूर्वक लागू करते हैं, जिससे प्राचीन ज्ञान और गणनात्मक सटीकता एकसाथ आते हैं।