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गुजराती संवत 2085 – 2086 · विक्रम संवत 2085 – 2086

गुजराती त्योहार 2029

Mumbai, Maharashtra, India · 12 चांद्र मास
Mumbai, Maharashtra, India बदलें

2029 में गुजराती कैलेंडर के अनुसार 196 त्योहार और व्रत-पर्व आते हैं। प्रमुख उत्सवों में शामिल हैं: Makar Sankranti, Republic Day, Holi, Independence Day, Sharad Navratri। वैदिक पंचांग में नए हैं? देखें यह कैसे काम करता है।

समय प्रारूप
साल, महीने दर महीने
दिखाएँ
01

जनवरी

Maha (મહા)
JAN14
Makar Sankranti मुख्य
JAN19
Goddess Saraswati
JAN22
Surya (Sun God)
JAN26
Republic Day मुख्य
व्रत एवं उपवास के दिन
शिवरात्रि
पूर्णिमा
अमावस्या
अन्य उपवास
02

फ़रवरी

Fagan (ફાગણ)
व्रत एवं उपवास के दिन
चतुर्थी व चौथ
शिवरात्रि
पूर्णिमा
अमावस्या
03

मार्च

Chaitra (Adhik) (ચૈત્ર)
MAR1
Holi मुख्य
Lord Krishna
व्रत एवं उपवास के दिन
चतुर्थी व चौथ
शिवरात्रि
पूर्णिमा
अमावस्या
अन्य उपवास
04

अप्रैल

Chaitra (ચૈત્ર)
व्रत एवं उपवास के दिन
चतुर्थी व चौथ
शिवरात्रि
पूर्णिमा
अमावस्या
05

मई

Vaishakh (વૈશાખ)
व्रत एवं उपवास के दिन
शिवरात्रि
पूर्णिमा
अमावस्या
06

जून

Jeth (જેઠ)
व्रत एवं उपवास के दिन
चतुर्थी व चौथ
शिवरात्रि
पूर्णिमा
अमावस्या
07

जुलाई

Ashadh (અષાઢ)
व्रत एवं उपवास के दिन
08

अगस्त

Shravan (શ્રાવણ)
09

सितंबर

Bhadarvo (ભાદરવો)
व्रत एवं उपवास के दिन
चतुर्थी व चौथ
शिवरात्रि
पूर्णिमा
अमावस्या
10

अक्तूबर

Aaso (આસો)
व्रत एवं उपवास के दिन
चतुर्थी व चौथ
शिवरात्रि
पूर्णिमा
अमावस्या
11

नवंबर

Kartak (કારતક)
12

दिसंबर

Magshar (માગશર)
व्रत एवं उपवास के दिन
चतुर्थी व चौथ
शिवरात्रि
पूर्णिमा
अमावस्या

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुजराती वर्ष चैत्र में नहीं, कारतक में क्यों शुरू होता है?
कार्तिक-आधारित विक्रम संवत एक ऐतिहासिक गुजराती परम्परा है जो नव वर्ष को दीपावली के अगले दिन — बेस्तु वरस, कारतक शुक्ल प्रतिपदा — से जोड़ती है। विक्रम संवत की दो मान्य गणनाएँ हैं: एक चैत्र-आधारित (अधिकांश उत्तर भारतीय हिन्दुओं की, गुड़ी पड़वा पर) और दूसरी कार्तिक-आधारित (गुजरात, महाराष्ट्र के कुछ भाग, और कुछ जैन समुदायों की)। खगोलीय चान्द्र दिन दोनों में एक समान हैं; केवल वर्ष-परिवर्तन की तिथि भिन्न है। इससे अप्रैल (चैत्र परिवर्तन) से नवम्बर (कारतक परिवर्तन) के बीच गुजराती VS एक पीछे रहता है — और कारतक से अगले चैत्र तक दोनों बराबर हो जाते हैं।
2026 में दीपावली कब है और दीपावली-सप्ताह का क्रम क्या होगा?
दीपावली आसो कृष्ण अमावस्या पर पड़ती है — गुजराती माह आसो (आश्विन) की अमावस्या — अक्टूबर के अन्त या नवम्बर के मध्य में, वर्ष के अनुसार। 2026 की पाँच दिन की क्रमबद्धता: धनतेरस (आसो कृष्ण त्रयोदशी), काली चौदस (आसो कृष्ण चतुर्दशी, काली-पूजा की रात), दीपावली / लक्ष्मी पूजा (आसो कृष्ण अमावस्या), बेस्तु वरस (कारतक शुक्ल पड़वो — नव वर्ष, दीपावली की सुबह), भाई बीज (कारतक शुक्ल बीज — भाई-दूज समकक्ष)। सटीक 2026 ग्रेगोरियन तिथियों के लिए इस कैलेंडर पर आसो और कारतक माह देखें।
लाभ पंचमी क्या है और गुजराती व्यापार के लिए क्यों महत्त्वपूर्ण है?
लाभ पंचमी कारतक शुक्ल पंचमी है — बेस्तु वरस के पाँच दिन बाद, नए गुजराती वर्ष का पाँचवाँ दिन। नाम का अर्थ है 'लाभकारी पंचमी' (लाभ = फायदा, पंचमी = पाँचवाँ)। इसे नए वर्ष में दुकान खोलने, व्यापारिक समझौते करने और नए उद्यम शुरू करने का सबसे शुभ दिन माना जाता है। कई गुजराती व्यापारी दीपावली से लाभ पंचमी तक — छह दिन — दुकानें बन्द रखते हैं और पूजा के साथ लाभ पंचमी पर पुनः खोलते हैं। सूरत और मुम्बई के हीरा और कपड़ा व्यापारियों में लाभ पंचमी वास्तविक व्यापारिक वर्ष का आरम्भ है।
उत्तरायण क्या है और गुजरात में कैसे मनाया जाता है?
उत्तरायण मकर संक्रान्ति (14 जनवरी) है — सूर्य का मकर राशि में प्रवेश, जो उसकी उत्तरायण (उत्तर दिशा की) यात्रा का आरम्भ है। गुजरात में उत्तरायण मुख्यतः पतंग उत्सव है: अहमदाबाद का अन्तर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव, सूरत और वडोदरा में घर की छतों पर भोर से पतंगबाजी, और आकाश में माँजे की लड़ाई। खाना भी उत्तरायण का अभिन्न हिस्सा है: चिक्की (तिल-मूँगफली की गचक), तिल-गुड़ की मिठाइयाँ, और उंधियु (मिट्टी के बर्तन में उलटा पकाया जाने वाला मिश्रित सब्जी का व्यंजन)। वासी-उत्तरायण अगले दिन उत्सव को आगे बढ़ाती है। यही खगोलीय घटना तमिलनाडु में पोंगल और बंगाल में पिठे-पर्बन के रूप में मनाई जाती है।
गुजराती श्रावण में क्या-क्या परहेज रखते हैं?
श्रावण (जुलाई-अगस्त) शिवभक्ति का चरम मास है और कई गुजरातियों के लिए सबसे सख्त आहार-मास। पूर्ण शाकाहार सामान्य है; बहुत से परिवार पूरे माह प्याज-लहसुन भी नहीं खाते। श्रावण सोमवार (सोमवार के दिन) भगवान शिव के लिए उपवास हैं — व्रत, शिव मंदिर में अभिषेक, और सन्ध्याकाल में व्रत तोड़ना। जन्माष्टमी (श्रावण कृष्ण अष्टमी) मध्यरात्रि में कृष्ण-जन्म उत्सव, मटकी-फोड़ और रात-भर भजन के साथ मनाई जाती है। वल्लभाचार्य सम्प्रदाय का पुष्टिमार्ग — गुजरात का प्रमुख वैष्णव सम्प्रदाय — श्रावण में हवेली संगीत (कृष्ण मंदिरों में भक्तिसंगीत) और अखण्ड कीर्तन के लिए विशेष रूप से सक्रिय रहता है।
अक्षय तृतीया गुजरात में सोने का सबसे बड़ा दिन क्यों है?
अक्षय तृतीया (वैशाख शुक्ल तृतीया, अप्रैल-मई) वैदिक कैलेंडर के चार 'अक्षय' या स्वयंसिद्ध शुभ दिनों में से एक है — इन दिनों अलग से मुहूर्त की आवश्यकता नहीं होती। गुजराती ज्वैलरी शोरूम इस दिन वर्ष की सबसे बड़ी बिक्री करते हैं; यह विश्वास है कि इस दिन सोना खरीदने से अक्षय (अविनाशी) समृद्धि आती है। बिना अलग मुहूर्त के विवाह और गृहप्रवेश भी इसी दिन रखे जाते हैं। अखिल भारतीय पर्व होने के बावजूद गुजरात का व्यापारिक उत्साह इसे वर्ष का सर्वोच्च सोना-खरीद का क्षण बनाता है। जैन गुजराती इसे अखा त्रिज के रूप में भी मनाते हैं।