कूर्म जयंती
Lord Vishnu (Kurma avatar)
यह कब पड़ता है
तिथि बदलती है क्योंकि यह चंद्रमा का अनुसरण करती है, ग्रेगोरियन कैलेंडर का नहीं।
भारत (IST) के लिए सटीक पंचांग गणना। दूर पूर्व या पश्चिम के स्थानों पर तिथि एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।
कूर्म कौन हैं और यह दिन क्यों महत्वपूर्ण है
कूर्म भगवान विष्णु द्वारा धारण किया गया कछुआ (कूर्म) रूप है, जिसे उनके दस प्रमुख अवतारों (दशावतार) में दूसरा गिना जाता है। इनका प्रकट होना पुराणों के सबसे प्रसिद्ध प्रसंगों में से एक से जुड़ा है: क्षीर सागर का मंथन (समुद्र मंथन), जिसे देवताओं और असुरों ने मिलकर अमृत — अमरत्व का रस — तथा सागर की गहराई में खोए अन्य रत्नों को पुनः प्राप्त करने के लिए किया था।
सागर मंथन के लिए विशाल मंदराचल पर्वत को मथानी के रूप में और वासुकि नाग को रस्सी के रूप में प्रयोग किया गया। जब पर्वत समुद्र की नरम तली में धँसने लगा, तब विष्णु ने कूर्म रूप में अवतार लेकर उसे अपनी पीठ पर थाम लिया, जिससे मंथन को एक स्थिर आधार मिला और कार्य आगे बढ़ सका। एक समूचे पर्वत को धैर्यपूर्वक थामे हुए कछुए की यह छवि स्थिरता, सहनशीलता और उस मौन सहयोग का प्रतीक मानी जाती है, जो बड़े प्रयासों को सफल बनाता है।
यह दिन वैशाख की पूर्णिमा को आता है, जो प्रायः अप्रैल या मई में पड़ता है। इसे किसी बड़े सार्वजनिक उत्सव के बजाय मध्यम महत्व की जयंती के रूप में मनाया जाता है, और मुख्यतः वैष्णव परिवारों तथा विष्णु मंदिरों में पूजा, व्रत और अवतार की कथा के स्मरण के साथ पाला जाता है।
अनुष्ठान एवं परंपरा
कूर्म जयंती एक शांत, भक्तिमय अनुष्ठान है जो भगवान विष्णु के कछुआ रूप की पूजा पर केंद्रित है। इस दिन को मनाने के सामान्य तरीके इस प्रकार हैं:
- दिन भर व्रत (उपवास) रखें, या केवल सरल सात्विक भोजन ग्रहण करें, और विष्णु के व्रतों की परंपरा के अनुसार संध्या पूजन के बाद उसे खोलें।
- भगवान विष्णु या कूर्म की मूर्ति का स्नान कराकर पूजन करें, और तुलसी दल, पुष्प, धूप तथा दीप (दीया) अर्पित करें।
- समुद्र मंथन के प्रसंग तथा पुराणों में वर्णित विष्णु के अन्य अवतारों की कथाओं को पढ़ें या सुनें।
- विष्णु के नामों या स्तोत्रों, जैसे विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें, और दिन भर अवतार के मंत्रों का जाप करें।
- चूँकि यह दिन पूर्णिमा है, कुछ लोग दान भी करते हैं — जरूरतमंदों को अन्न, जल या अनाज अर्पित करते हैं।
- ऐसे विष्णु मंदिर के दर्शन करें जहाँ इस अवतार की पूजा होती है, और दिन के पूजन तथा विशेष भोग में सम्मिलित हों।
यह तिथि कैसे निर्धारित होती है
Observed on the full-moon day (Purnima) of Vaishakha (Shukla paksha), reckoned by sunrise (udaya tithi).
तिथियाँ NASA/JPL की खगोलीय गणना से निकाली जाती हैं और पारंपरिक पंचांग के अनुरूप होती हैं।