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महावीर जयंती के लिए भोर में शांत जैन मंदिर और दीपक

महावीर जयंती

भगवान महावीर

आगामी
226 दिनों में
क्षेत्रीय पर्व
महावीर जयंती 2027 19 अप्रैल 2027 (सोमवार) को है, जो शुक्ल पक्ष की तेरहवीं तिथि (चैत्र शुक्ल त्रयोदशी) है। यह जैन धर्म के चौबीसवें और अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर के जन्म का दिन है, और इसे मंदिर पूजन, उनकी प्रतिमा के अभिषेक, दान तथा अहिंसा के उनके उपदेश पर चिंतन के साथ मनाया जाता है।

यह कब पड़ता है

तिथि बदलती है क्योंकि यह चंद्रमा का अनुसरण करती है, ग्रेगोरियन कैलेंडर का नहीं।

भारत (IST) के लिए सटीक पंचांग गणना। दूर पूर्व या पश्चिम के स्थानों पर तिथि एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।

महत्व और कथा

महावीर जयंती वर्धमान के जन्म का उत्सव मनाती है, जो आगे चलकर भगवान महावीर के नाम से जाने गए और जैन धर्म के चौबीसवें तथा अंतिम तीर्थंकर हुए। तीर्थंकर वह आत्मा है जो मुक्ति प्राप्त करती है और दूसरों को सांसारिक सागर पार करने का मार्ग दिखाती है। एक राजपरिवार में जन्मे महावीर ने अपना राजसी जीवन त्याग दिया और दीर्घ तपस्या के बाद वह महान उपदेष्टा बने जिनके वचन आज भी जैन परंपरा का मार्गदर्शन करते हैं।

उनका उपदेश कुछ ही व्रतों के एक समुच्चय पर टिका है जो समूचे जीवन को व्यवस्थित करता है। इसका केंद्रीय व्रत अहिंसा है, अर्थात् मन, वचन और कर्म से किसी भी प्राणी को हानि न पहुँचाना। इसके साथ सत्य, अस्तेय (चोरी न करना), ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह (अनासक्ति तथा संग्रह का त्याग) खड़े हैं। ये पाँच व्रत बाहर से थोपे गए नियमों के रूप में नहीं, बल्कि उस अनुशासन के रूप में पढ़े जाते हैं जो आत्मा को हानि और तृष्णा से मुक्त करता है।

यह दिन चैत्र शुक्ल त्रयोदशी, अर्थात् चैत्र के शुक्ल पक्ष की तेरहवीं तिथि को पड़ता है, जो प्रायः मार्च या अप्रैल में आता है। समूचे भारत में यह सर्वाधिक व्यापक रूप से मनाया जाने वाला जैन पर्व है, जिसे दिगंबर और श्वेतांबर दोनों परंपराएँ मनाती हैं। इसका स्वरूप उत्सवी कम और भक्तिपूर्ण तथा सुधारवादी अधिक है: यह तीर्थंकर का सम्मान करने, उनके जीवन को स्मरण करने और उनके सिखाए व्रतों के प्रति अपने संकल्प को नवीन करने का दिन है।

अनुष्ठान एवं परंपरा

अनुष्ठान शांत होता है और मंदिर, दान तथा चिंतन पर केंद्रित रहता है। सामान्य प्रथाओं में निम्नलिखित हैं:

  • अभिषेक (विधिवत स्नान): तीर्थंकर की प्रतिमा को जल और अर्पणों के साथ विधिवत स्नान (अभिषेक) कराया जाता है, जिसके बाद उसे श्रृंगारित कर पूजा जाता है।
  • रथ-यात्रा (शोभायात्रा): अनेक नगरों में भगवान महावीर की प्रतिमा को शोभायात्रा में ले जाया जाता है, जिसके साथ भक्त, स्तुति-गान और उनके उपदेशों का पाठ चलता है।
  • पाठ और कथा: महावीर के जीवन और पाँच व्रतों पर श्लोकों एवं प्रवचनों का पाठ तथा विवेचन होता है, ताकि दिन का अर्थ केवल चिह्नित होने के बजाय नवीन हो उठे।
  • दान और भिक्षादान: अनासक्ति के अनुरूप जरूरतमंदों को देना इस दिन का केंद्र है, और अनेक लोग भोजन वितरण, चिकित्सा सहायता या पशुओं की देखभाल में सहयोग करते हैं।
  • व्रत और मंदिर दर्शन: भक्त व्रत या सात्त्विक आहार रखते हैं और दर्शन तथा पूजन हेतु मंदिर जाते हैं, जिससे दिन भोज के बजाय संयम की ओर मुड़ता है।
  • पाँच व्रतों पर चिंतन: यह दिन अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह पर विचार करने और उनके अनुसार जीने के अपने संकल्प को नवीन करने के लिए रखा जाता है।

क्षेत्रीय विविधताएँ

समूचे भारत में
महावीर जयंती सर्वाधिक व्यापक रूप से मनाया जाने वाला जैन पर्व है, जो जहाँ भी जैन समुदाय रहते हैं वहाँ और दिगंबर तथा श्वेतांबर दोनों परंपराओं द्वारा मनाया जाता है। मंदिरों में अभिषेक और प्रतिमा की शोभायात्रा होती है, और अनेक समुदाय इस दिन को दान तथा भोजन वितरण के साथ चिह्नित करते हैं।
तीर्थ नगर और तीर्थस्थल
प्रमुख जैन मंदिरों और तीर्थ केंद्रों पर यह दिन बड़ी संख्या में लोगों को आकर्षित करता है, जहाँ तीर्थंकर का विधिवत स्नान और आसपास की गलियों में रथ-यात्रा होती है, जिसके साथ स्तुति-गान तथा महावीर के उपदेशों का वाचन चलता है।
यह तिथि कैसे निर्धारित होती है

यह पर्व चंद्र पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल त्रयोदशी के संयोग पर निर्धारित होता है।

तिथियाँ NASA/JPL की खगोलीय गणना से निकाली जाती हैं और पारंपरिक पंचांग के अनुरूप होती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2027 में महावीर जयंती कब है?
महावीर जयंती 2027 19 अप्रैल 2027 (सोमवार) को है। यह शुक्ल पक्ष की तेरहवीं तिथि (चैत्र शुक्ल त्रयोदशी) को मनाई जाती है, यही कारण है कि यह किसी निश्चित कैलेंडर तिथि के बजाय प्रायः मार्च या अप्रैल में पड़ती है।
हर वर्ष तिथि क्यों बदलती है?
यह दिन हिंदू तथा जैन चंद्र कैलेंडर का अनुसरण करता है, ग्रेगोरियन का नहीं। यह चैत्र शुक्ल त्रयोदशी से निर्धारित होता है, और चूँकि चंद्र तथा सौर कैलेंडर ठीक-ठीक मेल नहीं खाते, इसलिए इससे मिलती-जुलती अंग्रेज़ी-कैलेंडर तिथि हर वर्ष बदलती रहती है, जो प्रायः मार्च और अप्रैल के भीतर ही रहती है।
भगवान महावीर कौन थे?
भगवान महावीर, जिनका जन्म-नाम वर्धमान था, जैन धर्म के चौबीसवें और अंतिम तीर्थंकर थे। उन्होंने राजसी जीवन त्यागकर तपस्या अपनाई और जैन मार्ग के महान उपदेष्टा बने, जो सबसे अधिक अपने अहिंसा के उपदेश और जैन जीवन को व्यवस्थित करने वाले पाँच व्रतों के लिए जाने जाते हैं।
महावीर ने कौन-से पाँच व्रत सिखाए?
पाँच व्रत हैं अहिंसा, सत्य, अस्तेय (चोरी न करना), ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह (अनासक्ति)। ये मिलकर जैन धर्म का नैतिक मर्म रचते हैं, और महावीर जयंती इन पर चिंतन करने तथा अपने संकल्प को नवीन करने का दिन है।
महावीर जयंती कैसे मनाई जाती है?
जैन तीर्थंकर की प्रतिमा का विधिवत स्नान (अभिषेक) कराते हैं, उनकी प्रतिमा को रथ-यात्रा में ले जाते हैं, उनके उपदेशों का पाठ करते हैं, और दान तथा भिक्षादान की ओर मुड़ते हैं। अनेक लोग व्रत रखते हैं और मंदिर जाते हैं। यह दिन शांत और भक्तिपूर्ण होता है, जो उत्सव के बजाय चिंतन पर केंद्रित रहता है।

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