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शनि गोचर 2030

2030 में शनि क्या करता है: कब राशि और नक्षत्र बदलता है, कब वक्री होता है, और कब सूर्य से अस्त होता है। हर तिथि वास्तविक है — जनवरी से पहले शुरू हुई अवधि वैसा ही बताती है।

शनि — वर्ष दर वर्ष

शनि इस वर्ष एक बार राशि बदलता है

शनि पूरे 2030 एक ही राशि में नहीं रहता — नीचे दी तिथियाँ उसके वास्तविक प्रवेश और निर्गम की हैं, कैलेंडर की नहीं।

राशि परिवर्तन
1
नक्षत्र परिवर्तन
3
दिशा परिवर्तन
2
अस्त काल
1

शनि — राशि दर राशि

  • मेष 5 अक्टूबर 2029 → 17 अप्रैल 2030 (पहले शुरू) पुनः प्रवेश
  • वृषभ 17 अप्रैल 2030 → 31 मई 2032 (आगे भी जारी) पुनः प्रवेश

2030 में क्या होता है

  • 19 जनवरी 2030 मार्गी होता है — मेष 23.8°
  • 21 सितंबर 2030 वक्री होता है — वृषभ 14.7°
  • 1 मई 2030 शनि 6 जून 2030 तक अस्त रहता है सूर्य से 15° के भीतर — शास्त्रीय जन्मकालीन कक्षा। अस्त ग्रह के फल इस अवधि में रुके रहते हैं।

स्तंभन तिथियाँ IST में हैं। स्तंभन एक क्षण होता है, इसलिए दूसरे समय-क्षेत्र के स्रोत इसे एक दिन आगे-पीछे दिखा सकते हैं।

नक्षत्रों में शनि

राशि लंबा अध्याय है। नक्षत्र उसके भीतर का छोटा हिस्सा है, और उसका अपना स्वामी ग्रह होता है — यही गोचर का स्वभाव बदलता है।

नक्षत्र स्वामी से तक अवधि
भरणी शुक्र 20 नवंबर 2029 17 मार्च 2030 3.8 माह पुनः प्रवेश
कृत्तिका सूर्य 17 मार्च 2030 6 जुलाई 2030 3.7 माह पुनः प्रवेश
रोहिणी चंद्र 6 जुलाई 2030 12 दिसंबर 2030 5.2 माह
कृत्तिका सूर्य 12 दिसंबर 2030 25 मार्च 2031 3.4 माह पुनः प्रवेश

वक्री होने पर ग्रह नक्षत्र की सीमा दोबारा पार करता है, इसलिए एक ही नक्षत्र एक से अधिक बार दिख सकता है। ऐसी पंक्तियाँ पुनः प्रवेश के रूप में चिह्नित हैं।