सर्वतोभद्र चक्र
सभी के लिए समानग्रह स्थिति
अभी प्रत्येक ग्रह कहाँ है — भूकेन्द्रीय, अतः सबके लिए समान।
| ग्रह | राशि व अंश | नक्षत्र | गति |
|---|---|---|---|
| सूर्य | 15°27′ मिथुन | Ardra पाद 3 | 0.95°/दिन |
| चंद्र | 1°59′ मकर | Uttara Ashadha पाद 2 | 12.02°/दिन |
| मंगल | 7°41′ वृषभ | Krittika पाद 4 | 0.71°/दिन |
| बुध | 1°54′ कर्क | Punarvasu पाद 4 | R 0.13°/दिन |
| गुरु | 6°02′ कर्क | Pushya पाद 1 | 0.21°/दिन |
| शुक्र | 26°31′ कर्क | Ashlesha पाद 3 | 1.13°/दिन |
| शनि | 19°58′ मीन | Revati पाद 1 | 0.04°/दिन |
| राहु | 8°19′ कुंभ | Shatabhisha पाद 1 | R 0.05°/दिन |
| केतु | 8°19′ सिंह | Magha पाद 3 | R 0.05°/दिन |
गति = दैनिक चाल; R वक्री दर्शाता है। वेध दिखाता है कि आज प्रत्येक ग्रह आपके किन संवेदनशील तारों का, किस दिशा से वेध करता है।
व्यक्तिगत बनाने से क्या जुड़ता है
आपके जन्म नक्षत्र से छह संवेदनशील बिंदु निकाले जाते हैं। व्यक्तिगत बनाएं और देखें कि प्रत्येक चक्र पर कहाँ पड़ता है और आज कौन-से ग्रह उन पर वेध कर रहे हैं।
अपना चक्र व्यक्तिगत बनाएं
अपना व्यक्तिगत चक्र देखने के लिए जन्म विवरण दर्ज करें (या साइन इन करें) — आपके छह संवेदनशील तारे और आज कौन-से ग्रह आपका साथ दे रहे हैं या बाधा डाल रहे हैं।
जन्म की जानकारी भरें
जन्म प्रोफ़ाइल सेव करें
अपनी जन्म जानकारी सेव करें और कभी भी अपनी कुंडली खोलने के लिए फ्री अकाउंट बनाएं।
फ्री खाता बनाएंसर्वतोभद्र चक्र क्या है?
सर्वतोभद्र चक्र (संस्कृत में 'सब दिशाओं से शुभ' — सर्वतः अर्थात सभी दिशाएँ, भद्र अर्थात शुभ) 81 कोशिकाओं का एक 9×9 ग्रिड है जो हिंदू पंचांग के मूल अंगों को एक ही दिशा-केंद्रित आरेख में दर्शाता है: 28 नक्षत्र, 12 राशियाँ, संस्कृत स्वर व व्यंजन, तिथियाँ और सात वार। यह शास्त्रीय मुहूर्त ज्योतिष का सबसे व्यापक साधनों में से एक है।
जहाँ अधिकांश मुहूर्त-जाँच केवल एक कारक — जैसे जन्म नक्षत्र या वार — को तौलती हैं, वहीं सर्वतोभद्र चक्र व्यक्ति के अनेक 'निर्देशांक' एक साथ जोड़ता है। दिन की ग्रह-स्थितियों को ग्रिड पर रखकर यह एक नज़र में दिखाता है कि गतिशील ग्रह आपसे जुड़े बिंदुओं को — हर दिशा में — सहारा दे रहे हैं या बाधा डाल रहे हैं। यही सर्वांगीण दृष्टि इसके नाम का वादा है।
ज्योतिषी इसका उपयोग शुभ कार्यों के लिए शुभ दिन चुनने, मुहूर्त व प्रश्न (होरारी) कार्य, तथा वार्षिक (वर्षफल) विश्लेषण में करते हैं। यह साधन प्रामाणिक चक्र बनाता है, किसी भी तिथि के लिए सजीव ग्रह-गोचर दर्शाता है, और — जब आप अपना जन्म नक्षत्र जोड़ते हैं — आपके छह संवेदनशील बिंदु तथा आज उन पर पड़ने वाले वेध उजागर करता है।
सर्वतोभद्र चक्र कैसे काम करता है?
ग्रिड की संरचना निश्चित है और सबके लिए समान है। बाहरी वलय में 28 नक्षत्र (अभिजित सहित) घड़ी की दिशा में चलते हैं। उसके भीतर एक पट्टी में संस्कृत अक्षर हैं जो नाम-आधारित मुहूर्त का आधार हैं। भीतरी वर्ग में 12 राशियाँ हैं, और केंद्रीय क्रॉस में पाँच तिथि-समूह — नंदा, भद्रा, जया, रिक्ता और पूर्णा — सात वारों सहित स्थित हैं।
प्रतिदिन नौ ग्रह विशेष नक्षत्रों में रहते हैं, और उन स्थितियों को चक्र पर अंकित किया जाता है। कोई ग्रह किसी बिंदु का वेध ('भेदन') तब करता है जब वह सीधे उस पर बैठा हो, या ग्रिड के केंद्र के ठीक सामने हो (सम्मुख वेध)। नैसर्गिक पाप ग्रह (सूर्य, मंगल, शनि, राहु, केतु) का वेध बाधा का संकेत देता है; नैसर्गिक शुभ ग्रह (गुरु, शुक्र, बुध, चंद्र) का वेध रक्षा देता है।
वैयक्तिकरण आपके जन्म नक्षत्र — जन्म के समय चंद्र जिस तारे में था — से आता है। उससे आगे गिनने पर छह संवेदनशील बिंदु मिलते हैं: जन्म, कर्म, संघातिक, समुदाय, वैनाशिक और मानस, प्रत्येक किसी जीवन-क्षेत्र से जुड़ा। जब कोई गोचर ग्रह इनमें से किसी का वेध करता है, तो उस दिन वह क्षेत्र उभरता है। सहायक व बाधक वेधों की तुलना ही किसी तिथि को चुनने या टालने का आधार है।
मुख्य अवधारणाएँ
इक्यासी कोशिकाएँ दिशाओं के चारों ओर व्यवस्थित, ऊपर उत्तर। यह विन्यास निश्चित व सार्वभौम है — यही वह कैनवास है जिस पर बदलते ग्रह अंकित होते हैं, किसी दिन सबके लिए समान।
28 नक्षत्र — 27 चंद्र-मंडल और अभिजित — क्रम में किनारे पर रहते हैं। यहीं गोचर ग्रह पढ़े जाते हैं, और वेध विश्लेषण की मुख्य परत यही है।
आपके जन्म नक्षत्र से गिने जाते हैं: जन्म (स्वास्थ्य व मन), कर्म (करियर), संघातिक (संबंध व धन), समुदाय (भाग्य), वैनाशिक (हानि व विवाद) और मानस (मानसिक शांति)। ये चक्र पर आपके व्यक्तिगत संवेदन-बिंदु हैं।
गोचर ग्रह किसी बिंदु को उस पर बैठकर (प्रत्यक्ष) या केंद्र के सामने रहकर (सम्मुख वेध) प्रभावित करता है। पाप वेध बाधा का, और शुभ वेध सहारे व रक्षा का संकेत देता है।
तारों के अतिरिक्त चक्र में तिथियाँ, वार और संस्कृत अक्षर भी हैं — अतः किसी क्षण को केवल नक्षत्र से नहीं, बल्कि तिथि, वार और नाम की ध्वनि से भी परखा जा सकता है।
व्यावहारिक लाभ: जिन दिनों शुभ ग्रह आपके संवेदनशील बिंदुओं को सहारा दें वे नए आरंभ के लिए अनुकूल हैं, जबकि जिन दिनों पाप ग्रह जन्म या कर्म का वेध करें उन्हें अपरिवर्तनीय निर्णयों के लिए टालना श्रेष्ठ है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
उद्गम व परंपरा
सर्वतोभद्र चक्र ज्योतिष की मुहूर्त परंपरा का अंग है और प्रायः नरपति जयचर्या से जोड़ा जाता है — एक मध्ययुगीन ग्रंथ जिसने शुभ क्षण चुनने हेतु नक्षत्र, तिथि, वार व अक्षर चक्रों के उपयोग को व्यवस्थित किया, जिसमें मूलतः यात्रा व युद्ध के प्रश्न भी थे, इसीलिए राजाओं (नरपति, 'मनुष्यों का स्वामी') से इसका संबंध है।
शताब्दियों में यह मुख्यधारा के मुहूर्त व प्रश्न अभ्यास तथा वार्षिक वर्षफल पद्धति में समाहित हुआ। आज भी यह पंचांग-आधारित दिन-चयन का सुपरिचित अंग है, जिसका मूल्य इसी में है कि यह किसी क्षण को एक कारक के बजाय अनेक कोणों से एक साथ परखता है।