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मुंबई

मुंबई (बॉम्बे) पंचांग — 24 अगस्त 2026

सोमवार,

वर्षा
मुंबई, महाराष्ट्र, भारत
आज

मुंबई का पंचांग भारत के सबसे बड़े शहर की तटीय महाराष्ट्रीयन विरासत को दर्शाता है, जो अमांत चंद्र-मास परंपरा पर आधारित है। यहाँ सूर्योदय अरब सागर के क्षितिज से देखा जाता है, जो आंतरिक महाराष्ट्र की तुलना में पंचांग की गणनाओं को कुछ मिनट आगे कर देता है। शहर का पंचांग लालबागचा राजा, सिद्धिविनायक और बाबुलनाथ की भक्ति लय को आगे बढ़ाता है, और प्रत्येक आरती, तिथि अनुष्ठान, और त्योहार मुहूर्त की गणना इसी तटीय सौर समय से शुरू होती है।

मुंबई के पंचांग कैलेंडर पर तीन त्योहार सबसे प्रमुख हैं। भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी पर पड़ने वाली गणेश चतुर्थी पूरे शहर को दस दिनों तक एक सतत शोभायात्रा में बदल देती है, जो अनंत चतुर्दशी विसर्जन पर समाप्त होती है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को गुड़ी पाड़वा मराठी नववर्ष को रंगोली और औपचारिक ध्वजारोहण से चिह्नित करता है। दीवाली का केंद्र लक्ष्मी पूजा है, जिसका समय उस दिन के प्रदोष काल के विरुद्ध सटीक रूप से गणना किया जाता है। स्थानीय ज्योतिषी मासिक संकष्टी चतुर्थी व्रत पर भी कड़ी नज़र रखते हैं, जिसे सिद्धिविनायक में चंद्रोदय मुहूर्त के साथ मनाया जाता है, जो वर्ली, अंधेरी और नवी मुंबई के बीच मिनटों में भिन्न होता है।

दिन

सोमवार

सूर्योदय

6:22 पूर्वाह्न

सूर्यास्त

7:00 अपराह्न

चन्द्रोदय

4:34 अपराह्न

चन्द्रास्त

3:33 पूर्वाह्न

आज के त्योहार

तिथि

द्वादशी – शुक्ल पक्ष तक 6:21 पूर्वाह्न

नक्षत्र

पूर्वाषाढ़ा तक 8:28 अपराह्न
उत्तराषाढ़ा

योग

प्रीति शुभ
तक 7:04 पूर्वाह्न
आयुष्मान शुभ

करण

बव चर
तक 5:23 अपराह्न
बालव चर
तक 6:21 पूर्वाह्न
अभिजित मुहूर्त
12:15 अपराह्न – 1:06 अपराह्न
अमृत काल
3:08 अपराह्न – 4:55 अपराह्न
ब्रह्म मुहूर्त
4:51 पूर्वाह्न – 5:36 पूर्वाह्न
गोधूलि मुहूर्त
6:59 अपराह्न – 7:21 अपराह्न
निशीथ मुहूर्त
12:18 पूर्वाह्न – 1:04 पूर्वाह्न, 25 अग॰
विजय मुहूर्त
2:47 अपराह्न – 3:38 अपराह्न
प्रातः संध्या
5:14 पूर्वाह्न – 6:22 पूर्वाह्न
सायं संध्या
7:00 अपराह्न – 8:08 अपराह्न
राहु काल
7:57 पूर्वाह्न – 9:31 पूर्वाह्न
यमगण्ड
11:06 पूर्वाह्न – 12:41 अपराह्न
गुलिक काल
2:16 अपराह्न – 3:50 अपराह्न
दुर्मुहूर्त
1:06 अपराह्न – 1:57 अपराह्न
वर्ज्यम
4:26 पूर्वाह्न – 6:13 पूर्वाह्न

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चौघड़िया

मुहूर्त काल

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दिन के काल

अमृत
6:22 पूर्वाह्न – 7:57 पूर्वाह्न
काल
7:57 पूर्वाह्न – 9:31 पूर्वाह्न
शुभ
9:31 पूर्वाह्न – 11:06 पूर्वाह्न
रोग
11:06 पूर्वाह्न – 12:41 अपराह्न
उद्वेग
12:41 अपराह्न – 2:16 अपराह्न
चल
2:16 अपराह्न – 3:50 अपराह्न
लाभ
3:50 अपराह्न – 5:25 अपराह्न
अमृत
5:25 अपराह्न – 7:00 अपराह्न

रात्रि के काल

चल
7:00 अपराह्न – 8:25 अपराह्न
रोग
8:25 अपराह्न – 9:50 अपराह्न
काल
9:50 अपराह्न – 11:16 अपराह्न
लाभ
11:16 अपराह्न – 12:41 पूर्वाह्न, 25 अग॰
उद्वेग
12:41 पूर्वाह्न – 2:06 पूर्वाह्न, 25 अग॰
शुभ
2:06 पूर्वाह्न – 3:31 पूर्वाह्न, 25 अग॰
अमृत
3:31 पूर्वाह्न – 4:57 पूर्वाह्न, 25 अग॰
चल
4:57 पूर्वाह्न – 6:22 पूर्वाह्न, 25 अग॰

होरा

ग्रह होरा

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दिन के काल

चंद्र शुभ
6:22 पूर्वाह्न – 7:25 पूर्वाह्न
शनि अशुभ
7:25 पूर्वाह्न – 8:28 पूर्वाह्न
गुरु शुभ
8:28 पूर्वाह्न – 9:31 पूर्वाह्न
मंगल उग्र
9:31 पूर्वाह्न – 10:34 पूर्वाह्न
सूर्य उग्र
10:34 पूर्वाह्न – 11:38 पूर्वाह्न
शुक्र शुभ
11:38 पूर्वाह्न – 12:41 अपराह्न
बुध शुभ
12:41 अपराह्न – 1:44 अपराह्न
चंद्र शुभ
1:44 अपराह्न – 2:47 अपराह्न
शनि अशुभ
2:47 अपराह्न – 3:50 अपराह्न
गुरु शुभ
3:50 अपराह्न – 4:53 अपराह्न
मंगल उग्र
4:53 अपराह्न – 5:57 अपराह्न
सूर्य उग्र
5:57 अपराह्न – 7:00 अपराह्न

रात्रि के काल

शुक्र शुभ
7:00 अपराह्न – 7:57 अपराह्न
बुध शुभ
7:57 अपराह्न – 8:53 अपराह्न
चंद्र शुभ
8:53 अपराह्न – 9:50 अपराह्न
शनि अशुभ
9:50 अपराह्न – 10:47 अपराह्न
गुरु शुभ
10:47 अपराह्न – 11:44 अपराह्न
मंगल उग्र
11:44 अपराह्न – 12:41 पूर्वाह्न, 25 अग॰
सूर्य उग्र
12:41 पूर्वाह्न – 1:38 पूर्वाह्न, 25 अग॰
शुक्र शुभ
1:38 पूर्वाह्न – 2:35 पूर्वाह्न, 25 अग॰
बुध शुभ
2:35 पूर्वाह्न – 3:31 पूर्वाह्न, 25 अग॰
चंद्र शुभ
3:31 पूर्वाह्न – 4:28 पूर्वाह्न, 25 अग॰
शनि अशुभ
4:28 पूर्वाह्न – 5:25 पूर्वाह्न, 25 अग॰
गुरु शुभ
5:25 पूर्वाह्न – 6:22 पूर्वाह्न, 25 अग॰
वृषभ शुक्र
12:00 पूर्वाह्न – 1:31 पूर्वाह्न
मिथुन बुध
1:31 पूर्वाह्न – 3:43 पूर्वाह्न
कर्क चंद्र
3:43 पूर्वाह्न – 5:56 पूर्वाह्न
सिंह सूर्य
5:56 पूर्वाह्न – 8:05 पूर्वाह्न
कन्या बुध
8:05 पूर्वाह्न – 10:11 पूर्वाह्न
तुला शुक्र
10:11 पूर्वाह्न – 12:23 अपराह्न
वृश्चिक मंगल
12:23 अपराह्न – 2:37 अपराह्न
धनु गुरु
2:37 अपराह्न – 4:43 अपराह्न
मकर शनि
4:43 अपराह्न – 6:32 अपराह्न
कुंभ शनि
6:32 अपराह्न – 8:09 अपराह्न
मीन गुरु
8:09 अपराह्न – 9:43 अपराह्न
मेष मंगल
9:43 अपराह्न – 11:27 अपराह्न
वृषभ शुक्र
11:27 अपराह्न – 12:00 पूर्वाह्न, 25 अग॰

गौरी नल्ल नेरम

दक्षिण भारतीय मुहूर्त

पूर्ण गौरी पंचांग देखें →

दिन के काल

अमिर्धा
6:22 पूर्वाह्न – 7:57 पूर्वाह्न
विषम्
7:57 पूर्वाह्न – 9:31 पूर्वाह्न
रोगम्
9:31 पूर्वाह्न – 11:06 पूर्वाह्न
लाबम्
11:06 पूर्वाह्न – 12:41 अपराह्न
धनम्
12:41 अपराह्न – 2:16 अपराह्न
सुगम्
2:16 अपराह्न – 3:50 अपराह्न
सोरम्
3:50 अपराह्न – 5:25 अपराह्न
उथि
5:25 अपराह्न – 7:00 अपराह्न

रात्रि के काल

सुगम्
7:00 अपराह्न – 8:25 अपराह्न
सोरम्
8:25 अपराह्न – 9:50 अपराह्न
उथि
9:50 अपराह्न – 11:16 अपराह्न
अमिर्धा
11:16 अपराह्न – 12:41 पूर्वाह्न, 25 अग॰
विषम्
12:41 पूर्वाह्न – 2:06 पूर्वाह्न, 25 अग॰
रोगम्
2:06 पूर्वाह्न – 3:31 पूर्वाह्न, 25 अग॰
लाबम्
3:31 पूर्वाह्न – 4:57 पूर्वाह्न, 25 अग॰
धनम्
4:57 पूर्वाह्न – 6:22 पूर्वाह्न, 25 अग॰

अयनांश: लाहिरी

पंचांग क्या है?

पंचांग — जिसका शाब्दिक अर्थ है 'पाँच अंग' (पंच = पाँच, अंग = भाग) — भारत में हज़ारों वर्षों से प्रयोग किया जाने वाला पारम्परिक हिन्दू पञ्चाङ्ग और ज्योतिषीय कालगणना पद्धति है। यह प्रत्येक दिन के पाँच जरूरी खगोलीय तत्वों को दर्शाता है: तिथि (चान्द्र दिवस), नक्षत्र (चन्द्र भवन), योग (सूर्य-चन्द्र कोणीय संयोग), करण (अर्ध-तिथि), और वार (सप्ताह का दिन)। ये पाँचों तत्व मिलकर वैदिक कालगणना की रीढ़ बनाते हैं और अनुष्ठानों, संस्कारों तथा महत्वपूर्ण जीवन कार्यक्रमों के लिए शुभ मुहूर्त निर्धारित करने में अनिवार्य हैं।

ग्रेगोरियन कैलेण्डर के विपरीत जो केवल सौर चक्र का अनुसरण करता है, पंचांग एक सूर्य-चन्द्र (लूनिसोलर) पद्धति है जो चन्द्रमा की कलाओं और सूर्य की राशि-संक्रान्ति दोनों का समन्वय करती है। प्रत्येक दिन का पंचांग किसी विशिष्ट भौगोलिक स्थान से देखे गए सूर्य और चन्द्रमा की सटीक स्थितियों के आधार पर बदलता है। इसीलिए मुम्बई का पंचांग दिल्ली या चेन्नई से भिन्न होता है — ये गणनाएँ स्वाभाविक रूप से स्थान-निर्भर हैं, जो स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त से जुड़ी होती हैं।

पंचांग समस्त वैदिक ज्योतिषीय मुहूर्त-निर्धारण का आधार है। विवाह की तिथि चुनने से लेकर व्यापार आरम्भ करने तक, गृहप्रवेश संस्कार से लेकर शल्यचिकित्सा का समय निश्चित करने तक — पारम्परिक हिन्दू परिवार पंचांग से परामर्श लेते हैं ताकि उनके कार्य अनुकूल ब्रह्माण्डीय लय के अनुरूप हों। यह दैनिक हिन्दू जीवन में सबसे अधिक परामर्श किया जाने वाला संदर्भ बना हुआ है, जो प्राचीन खगोलीय ज्ञान को व्यावहारिक दैनिक निर्णयों से जोड़ता है।

पंचांग कैसे काम करता है?

पंचांग पद्धति स्थानीय सूर्योदय के समय सूर्य और चन्द्रमा की सटीक खगोलीय स्थितियों की गणना से आरम्भ होती है। इन स्थितियों से प्रत्येक पाँच तत्व गणितीय रूप से निकाले जाते हैं। तिथि चन्द्रमा और सूर्य के बीच के कोणीय अन्तर से निर्धारित होती है (प्रत्येक 12 अंश का खण्ड एक तिथि बनाता है)। नक्षत्र वह चान्द्र भवन है जिसमें चन्द्रमा स्थित है (क्रान्तिवृत्त को 27 समान खण्डों में विभाजित किया गया है, प्रत्येक 13 अंश 20 कला का)। योग सूर्य और चन्द्रमा के देशान्तरों के योगफल से प्राप्त होता है (प्रत्येक 13 अंश 20 कला का खण्ड एक योग देता है)। करण तिथि का आधा भाग है (प्रत्येक 6 अंश का खण्ड)। वार सप्ताह का दिन है, जिसमें प्रत्येक दिन एक विशिष्ट ग्रह द्वारा शासित होता है।

चूँकि चन्द्रमा प्रतिदिन लगभग 12 से 15 अंश और सूर्य लगभग 1 अंश चलता है, इसलिए सभी पंचांग तत्व दिन भर में अलग-अलग समय पर बदलते हैं। एक तिथि सुबह 10:30 बजे समाप्त हो सकती है जबकि नक्षत्र दोपहर 3:15 बजे परिवर्तित हो सकता है। यही कारण है कि सटीक पंचांग गणना के लिए केवल तिथि ही नहीं बल्कि सटीक भौगोलिक स्थान भी जरूरी है — स्थानीय सूर्योदय यह निर्धारित करता है कि प्रत्येक दिन का पंचांग चक्र कब आरम्भ होता है, और चन्द्रमा की तीव्र गति के कारण कुछ घण्टों का अन्तर भी सक्रिय तत्व को बदल सकता है।

आधुनिक पंचांग गणनाएँ ग्रह स्थितियों के लिए उच्च-सटीकता वाले खगोलीय इंजन का उपयोग करती हैं, साथ ही लाहिरी अयनांश (भारत सरकार द्वारा अधिकृत अयनांश) का प्रयोग करके उष्णकटिबन्धीय स्थितियों को वैदिक ज्योतिष में प्रयुक्त निरयन राशिचक्र में परिवर्तित करती हैं। यह कला-विकला स्तर की सटीकता सुनिश्चित करता है, जो पारम्परिक पञ्चाङ्ग प्रकाशकों की गणनाओं से मेल खाती है और इण्टरनेट कनेक्शन वाले किसी भी व्यक्ति के लिए आसान है।

पंचांग के पाँच अंग

तिथि (चान्द्र दिवस)

एक चान्द्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं, जो शुक्ल पक्ष (बढ़ती चन्द्र कला, 1-15) और कृष्ण पक्ष (घटती चन्द्र कला, 1-15) में विभाजित हैं। प्रत्येक तिथि के विशिष्ट शुभ या अशुभ गुण होते हैं। पूर्णिमा और अमावस्या सर्वाधिक महत्वपूर्ण तिथियाँ हैं।

नक्षत्र (चान्द्र भवन)

27 नक्षत्र क्रान्तिवृत्त को समान खण्डों में विभाजित करते हैं, प्रत्येक का एक अधिष्ठाता देवता और स्वामी ग्रह होता है। किसी भी समय चन्द्रमा का नक्षत्र कार्यों की प्रकृति को प्रभावित करता है — कुछ नक्षत्र यात्रा के लिए अनुकूल हैं, अन्य संस्कारों या व्यापार के लिए।

योग (सूर्य-चन्द्र संयोग)

27 योग सूर्य और चन्द्रमा के संयुक्त देशान्तरों से प्राप्त होते हैं। प्रत्येक योग का एक नाम और स्वभाव होता है — अत्यन्त शुभ सिद्ध योग से लेकर चुनौतीपूर्ण व्यतीपात तक। योग पंचांग में मुहूर्त मार्गदर्शन की एक अतिरिक्त परत जोड़ते हैं।

करण (अर्ध-तिथि)

कुल 11 करण हैं, जिनमें 7 चर करण प्रत्येक मास में आठ बार आते हैं और 4 स्थिर करण केवल एक बार आते हैं। करण मुहूर्त चयन के लिए सूक्ष्मतर विभाजन प्रदान करते हैं, जिनमें बव, बालव और कौलव सर्वाधिक शुभ माने जाते हैं।

वार (सप्ताह का दिन)

सप्ताह का प्रत्येक दिन एक ग्रह द्वारा शासित है: रविवार (सूर्य), सोमवार (चन्द्रमा), मंगलवार (मंगल), बुधवार (बुध), गुरुवार (गुरु/बृहस्पति), शुक्रवार (शुक्र), शनिवार (शनि)। वार का स्वामी ग्रह यह प्रभावित करता है कि उस दिन कौन से कार्य अनुकूल रहेंगे।

सामान्य प्रश्न

पंचांग का ऐतिहासिक उद्गम

पंचांग पद्धति की जड़ें वेदांग ज्योतिष में हैं, जो वेदों की छह सहायक विधाओं (वेदांगों) में से एक है और कम से कम 1400 ईसा पूर्व की है। ऋषि लगध को प्रारम्भिक ज्ञात वेदांग ज्योतिष ग्रन्थ की रचना का श्रेय दिया जाता है, जिसने चन्द्र और सौर चक्रों के अनुसरण के लिए गणितीय ढाँचा स्थापित किया। शताब्दियों में आर्यभट (476 ई.), वराहमिहिर (505 ई.) और भास्कराचार्य (1114 ई.) जैसे खगोलविदों ने गणनाओं को परिष्कृत किया और ग्रह स्थितियों एवं पंचांग तत्वों की गणना के लिए उत्तरोत्तर सटीक विधियाँ प्रस्तुत कीं।

वार्षिक पंचांग पञ्चाङ्ग प्रकाशित करने की परम्परा मध्यकाल में व्यापक हुई, जब भारत के प्रत्येक क्षेत्र ने अपना भरोसेमंद पंचांग विकसित किया। राष्ट्रीय पंचांग, जिसे भारत सरकार ने 1957 में मेघनाद साहा के नेतृत्व में पंचांग सुधार समिति के अन्तर्गत स्थापित किया, ने लाहिरी अयनांश को मानकीकृत किया और पंचांग गणनाओं के लिए एक वैज्ञानिक ढाँचा प्रदान किया। आज डिजिटल पंचांग उपकरण इस सहस्राब्दी-पुरानी परम्परा को आगे बढ़ाते हैं, जिससे सटीक दैनिक पाठ विश्व में कहीं भी किसी को भी आसान हो गए हैं।

मुंबई के बारे में

मुंबई में गणेश चतुर्थी कब मनाई जाती है?

गणेश चतुर्थी हर साल भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को पड़ती है। सटीक तिथि और स्थापना (मूर्ति स्थापना) का मुहूर्त मुंबई के सूर्योदय के विरुद्ध गणना किया जाता है; उस सुबह का पंचांग सटीक खिड़की दिखाता है। दस दिन बाद अनंत चतुर्दशी पर विसर्जन होता है।

मुंबई का पंचांग पुणे से थोड़ा अलग क्यों है?

दोनों शहर अमांत कैलेंडर का पालन करते हैं, लेकिन मुंबई का तटीय सूर्योदय पुणे से लगभग दो से तीन मिनट पहले होता है, जो हर तिथि-अंत और नक्षत्र-अंत समय को उसी अंतराल से बदल देता है। विवाह मुहूर्त या हवन समय के लिए, स्थानीय पंचांग का उपयोग किया जाना चाहिए।

मुंबई में संकष्टी चतुर्थी का चंद्रोदय समय क्या है?

संकष्टी चतुर्थी कृष्ण चतुर्थी को मासिक रूप से मनाई जाती है, जिसमें व्रत चंद्रोदय पर समाप्त होता है। सटीक चंद्रोदय समय मोहल्ले से मोहल्ले तक भिन्न होता है — दक्षिण मुंबई इसे पूर्वी उपनगरों से थोड़ा पहले देखता है। उस दिन का पंचांग स्थानीय मुंबई समय दिखाता है।

क्या मुंबई अमांत या पूर्णिमांत चंद्र मास का उपयोग करता है?

मुंबई अमांत परंपरा का पालन करता है, जहाँ चंद्र मास अमावस्या पर समाप्त होता है। यह अधिकांश महाराष्ट्र के लिए मानक है। उत्तर भारतीय पूर्णिमांत कैलेंडर मास-नामकरण में लगभग दो सप्ताह से भिन्न होते हैं, जो त्योहार क्रॉस-संदर्भण के लिए महत्वपूर्ण है।

मुंबई के लिए अन्य उपकरण