श्रावण सोमवार
भगवान शिव
2026 की तिथियाँ
एक मासिक व्रत — इस वर्ष इसकी तिथियाँ यहाँ दी गई हैं।
भारत (IST) के लिए सटीक पंचांग गणना। दूर पूर्व या पश्चिम के स्थानों पर तिथि एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।
श्रावण सोमवार का अर्थ
श्रावण सोमवार भगवान शिव के लिए रखा जाने वाला सोमवार का व्रत है, जो पूरे श्रावण मास में दोहराया जाता है। सोमवार पारंपरिक रूप से शिव से जुड़ा है और श्रावण में यह एक दिन का पर्व नहीं, बल्कि हर सप्ताह निभाया जाने वाला अनुशासन बन जाता है। इसलिए इस पृष्ठ पर मास में आने वाले सभी सोमवार दिए जाते हैं।
महाराष्ट्र अमांत चंद्र कैलेंडर मानता है, जिसमें अमावस्या के बाद नया मास आरंभ होता है। उत्तर भारत में प्रचलित पूर्णिमांत कैलेंडर के कारण सावन सोमवार की अवधि अलग नागरिक तिथियों पर पड़ सकती है। भक्ति एक ही है, पर कैलेंडर की सीमा अलग है; इस पृष्ठ की महाराष्ट्र तिथियों को सामान्य राष्ट्रीय सूची से बदलना सही नहीं होगा।
इस व्रत का केंद्र शिव-पूजा है। परिवार और स्वास्थ्य के अनुसार कोई निराहार रहता है, कोई फल-दूध लेता है और कोई एक बार सादा भोजन करता है। शिव मंदिर में दर्शन, शिवलिंग पर जल या दूध से अभिषेक, बेलपत्र अर्पण और ॐ नमः शिवाय का जप सामान्य हैं। उपवास का एक ही रूप सबके लिए अनिवार्य नहीं है।
अनुष्ठान एवं परंपरा
श्रावण सोमवार मास के प्रत्येक सोमवार को रखा जाता है। उपवास और पूजा की विधि परिवार के अनुसार बदलती है, जबकि शिव-आराधना इसका साझा केंद्र रहती है।
- व्रत का संकल्प: भक्त दिन की शुरुआत सोमवार का व्रत रखने के संकल्प से करते हैं और अपने घर में चली आ रही उपवास-विधि का पालन करते हैं।
- शिव-दर्शन और पूजा: बहुत से भक्त शिव मंदिर जाते हैं या घर के देवस्थान में भगवान शिव की पूजा और प्रार्थना करते हैं।
- अभिषेक: शिवलिंग पर श्रद्धा से जल या दूध चढ़ाया जाता है; जिन मंदिरों में अभिषेक पुजारी या निश्चित समय पर होता है, वहाँ मंदिर के नियम माने जाते हैं।
- बेलपत्र अर्पण: स्वच्छ बेलपत्र, फूल और दीप अर्पित किए जाते हैं तथा शिव-नाम या ॐ नमः शिवाय का जप किया जाता है।
- व्रत पूर्ण करना: पारिवारिक परंपरा के अनुसार, प्रायः संध्या-पूजा के बाद फल या सादा सात्त्विक भोजन लेकर व्रत पूरा किया जाता है; कोई एक अनिवार्य भोजन-विधि नहीं है।
क्षेत्रीय विविधताएँ
यह तिथि कैसे निर्धारित होती है
यह पर्व चंद्र पंचांग के अनुसार श्रावण के संयोग पर निर्धारित होता है।
तिथियाँ NASA/JPL की खगोलीय गणना से निकाली जाती हैं और पारंपरिक पंचांग के अनुरूप होती हैं।