मुख्य सामग्री पर जाएं
श्रावण सोमवार पर शिवलिंग का दूध से अभिषेक और बेलपत्र

श्रावण सोमवार

भगवान शिव

अभी चल रहा है
आज
व्रत दिवस
श्रावण सोमवार महाराष्ट्र के अमांत श्रावण मास में आने वाले हर सोमवार को रखा जाता है। इस पृष्ठ पर 2026 की सभी तिथियाँ दी गई हैं; भक्त पारिवारिक परंपरा के अनुसार उपवास, शिव-दर्शन, अभिषेक, प्रार्थना और बेलपत्र अर्पण करते हैं।

2026 की तिथियाँ

एक मासिक व्रत — इस वर्ष इसकी तिथियाँ यहाँ दी गई हैं।

17 अग॰
सोम
24 अग॰
सोम
31 अग॰
सोम
7 सित॰
सोम

भारत (IST) के लिए सटीक पंचांग गणना। दूर पूर्व या पश्चिम के स्थानों पर तिथि एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।

श्रावण सोमवार का अर्थ

श्रावण सोमवार भगवान शिव के लिए रखा जाने वाला सोमवार का व्रत है, जो पूरे श्रावण मास में दोहराया जाता है। सोमवार पारंपरिक रूप से शिव से जुड़ा है और श्रावण में यह एक दिन का पर्व नहीं, बल्कि हर सप्ताह निभाया जाने वाला अनुशासन बन जाता है। इसलिए इस पृष्ठ पर मास में आने वाले सभी सोमवार दिए जाते हैं।

महाराष्ट्र अमांत चंद्र कैलेंडर मानता है, जिसमें अमावस्या के बाद नया मास आरंभ होता है। उत्तर भारत में प्रचलित पूर्णिमांत कैलेंडर के कारण सावन सोमवार की अवधि अलग नागरिक तिथियों पर पड़ सकती है। भक्ति एक ही है, पर कैलेंडर की सीमा अलग है; इस पृष्ठ की महाराष्ट्र तिथियों को सामान्य राष्ट्रीय सूची से बदलना सही नहीं होगा।

इस व्रत का केंद्र शिव-पूजा है। परिवार और स्वास्थ्य के अनुसार कोई निराहार रहता है, कोई फल-दूध लेता है और कोई एक बार सादा भोजन करता है। शिव मंदिर में दर्शन, शिवलिंग पर जल या दूध से अभिषेक, बेलपत्र अर्पण और ॐ नमः शिवाय का जप सामान्य हैं। उपवास का एक ही रूप सबके लिए अनिवार्य नहीं है।

अनुष्ठान एवं परंपरा

श्रावण सोमवार मास के प्रत्येक सोमवार को रखा जाता है। उपवास और पूजा की विधि परिवार के अनुसार बदलती है, जबकि शिव-आराधना इसका साझा केंद्र रहती है।

  • व्रत का संकल्प: भक्त दिन की शुरुआत सोमवार का व्रत रखने के संकल्प से करते हैं और अपने घर में चली आ रही उपवास-विधि का पालन करते हैं।
  • शिव-दर्शन और पूजा: बहुत से भक्त शिव मंदिर जाते हैं या घर के देवस्थान में भगवान शिव की पूजा और प्रार्थना करते हैं।
  • अभिषेक: शिवलिंग पर श्रद्धा से जल या दूध चढ़ाया जाता है; जिन मंदिरों में अभिषेक पुजारी या निश्चित समय पर होता है, वहाँ मंदिर के नियम माने जाते हैं।
  • बेलपत्र अर्पण: स्वच्छ बेलपत्र, फूल और दीप अर्पित किए जाते हैं तथा शिव-नाम या ॐ नमः शिवाय का जप किया जाता है।
  • व्रत पूर्ण करना: पारिवारिक परंपरा के अनुसार, प्रायः संध्या-पूजा के बाद फल या सादा सात्त्विक भोजन लेकर व्रत पूरा किया जाता है; कोई एक अनिवार्य भोजन-विधि नहीं है।

क्षेत्रीय विविधताएँ

महाराष्ट्र — अमांत श्रावण
इस पृष्ठ की तिथियाँ महाराष्ट्र के अमांत मास के अनुसार हैं, जो अमावस्या के बाद शुरू होता है। इसलिए सोमवारों का यह क्रम उत्तर भारतीय पूर्णिमांत कैलेंडर से बाद में पड़ सकता है।
उत्तर भारतीय सावन सोमवार
भक्ति का केंद्र वहाँ भी भगवान शिव ही हैं, लेकिन पूर्णिमांत मास की सीमा अलग तिथि-क्रम बनाती है। दोनों को क्षेत्रीय कैलेंडर-रूप समझना चाहिए, किसी एक को गलत नहीं।
यह तिथि कैसे निर्धारित होती है

यह पर्व चंद्र पंचांग के अनुसार श्रावण के संयोग पर निर्धारित होता है।

तिथियाँ NASA/JPL की खगोलीय गणना से निकाली जाती हैं और पारंपरिक पंचांग के अनुरूप होती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 में श्रावण सोमवार की तिथियाँ कब हैं?
श्रावण सोमवार एक बार नहीं, बार-बार आता है: महाराष्ट्र के अमांत श्रावण मास में पड़ने वाला हर सोमवार व्रत का दिन है। 2026 की पूरी सूची इस पृष्ठ के तिथि-भाग में दी गई है।
श्रावण में सोमवार का विशेष महत्व क्यों है?
सोमवार पारंपरिक रूप से भगवान शिव से जुड़ा है और श्रावण शिव-भक्ति का प्रमुख मास है। हर सोमवार व्रत, पूजा, अभिषेक और जप करने से पूरा मास साप्ताहिक साधना-क्रम बन जाता है।
महाराष्ट्र के श्रावण सोमवार और उत्तर भारत के सावन सोमवार की तिथियाँ अलग क्यों होती हैं?
महाराष्ट्र अमांत कैलेंडर मानता है, जिसमें अमावस्या के बाद मास आरंभ होता है। उत्तर भारत में कई कैलेंडर पूर्णिमांत पद्धति मानते हैं, इसलिए दोनों परंपराओं का सावन अलग नागरिक तिथियों पर शुरू और समाप्त हो सकता है।
श्रावण सोमवार पर भगवान शिव को क्या चढ़ाया जाता है?
सामान्यतः अभिषेक के लिए जल या दूध, बेलपत्र, फूल और दीप अर्पित किए जाते हैं। मंदिर और घर की परंपराएँ अलग हो सकती हैं, इसलिए स्थानीय मंदिर के नियम और पारिवारिक विधि को प्राथमिकता दी जाती है।
क्या श्रावण सोमवार पर पूरा उपवास अनिवार्य है?
सभी परिवार एक ही प्रकार का उपवास नहीं रखते। कोई निराहार रहता है, कोई फल या दूध लेता है और कोई एक बार सादा सात्त्विक भोजन करता है। स्वास्थ्य और घर की स्थापित परंपरा के अनुसार व्रत रखना उचित है।

इसके आसपास योजना बनाएँ