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गौरी पंचांग

Thursday, जुलाई 20, 2034

Columbus, Ohio, US
Updated जुल॰ 20, 2034
सूर्योदय 6:20 am सूर्यास्त 8:56 pm प्रत्येक काल: 1h 49m (दिन) / 1h 10m (रात)

दिन के काल

Dhanam Wealth
6:20 am — 8:09 am 1h 49m

शुभ कार्य: वित्तीय मामले, निवेश, सोना खरीदना, धन कार्य

Sugam Good
8:09 am — 9:59 am 1h 49m

शुभ कार्य: यात्रा, विश्राम, आरामदायक कार्य, छोटी यात्राएँ

Soram Bad
9:59 am — 11:48 am 1h 49m

त्याज्य: नई शुरुआत, मूल्यवान लेनदेन, यात्रा

Uthi Good
11:48 am — 1:38 pm 1h 49m

शुभ कार्य: नए उद्यम, करियर उन्नति, प्रगति कार्य

Visham Bad
1:38 pm — 3:27 pm 1h 49m

त्याज्य: महत्वपूर्ण निर्णय, बैठकें, समझौते, अनुबंध

Amirdha Best Rahu Kalam
3:27 pm — 5:17 pm 1h 49m

शुभ कार्य: सभी शुभ कार्य, आध्यात्मिक साधना, महत्वपूर्ण अनुष्ठान

Rogam Evil
5:17 pm — 7:06 pm 1h 49m

शुभ कार्य: चिकित्सा परामर्श

त्याज्य: चिकित्सा प्रक्रियाएँ, स्वास्थ्य निर्णय

Laabam Gain
7:06 pm — 8:56 pm 1h 49m

शुभ कार्य: व्यापारिक सौदे, वार्ता, बिक्री, लाभदायक कार्य

रात के काल

Amirdha Best
8:56 pm — 10:06 pm 1h 10m

शुभ कार्य: सभी शुभ कार्य, आध्यात्मिक साधना, महत्वपूर्ण अनुष्ठान

Rogam Evil
10:06 pm — 11:17 pm 1h 10m

शुभ कार्य: चिकित्सा परामर्श

त्याज्य: चिकित्सा प्रक्रियाएँ, स्वास्थ्य निर्णय

Laabam Gain
11:17 pm — 12:28 am 1h 10m

शुभ कार्य: व्यापारिक सौदे, वार्ता, बिक्री, लाभदायक कार्य

Dhanam Wealth
12:28 am — 1:38 am 1h 10m

शुभ कार्य: वित्तीय मामले, निवेश, सोना खरीदना, धन कार्य

Sugam Good
1:38 am — 2:49 am 1h 10m

शुभ कार्य: यात्रा, विश्राम, आरामदायक कार्य, छोटी यात्राएँ

Soram Bad
2:49 am — 3:59 am 1h 10m

त्याज्य: नई शुरुआत, मूल्यवान लेनदेन, यात्रा

Uthi Good
3:59 am — 5:10 am 1h 10m

शुभ कार्य: नए उद्यम, करियर उन्नति, प्रगति कार्य

Visham Bad
5:10 am — 6:21 am 1h 10m

त्याज्य: महत्वपूर्ण निर्णय, बैठकें, समझौते, अनुबंध

गौरी पंचांग क्या है?

गौरी पंचांग (जिसे गौरी पंचांगम् या गौरी नल्ल नेरम् भी कहते हैं) एक पारंपरिक दक्षिण भारतीय समय-विभाजन पद्धति है। यह प्रत्येक दिन को 8 दिवस-काल (सूर्योदय से सूर्यास्त) और 8 रात्रि-काल (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) में बांटती है — कुल 16 काल प्रति 24 घंटे।

प्रत्येक काल 8 गौरी प्रकारों में से एक के नाम पर है, जिनमें से प्रत्येक का एक विशेष गुण है। कालों का क्रम सप्ताह के दिन के अनुसार बदलता है, इसलिए एक ही समय-खंड में अलग-अलग दिनों पर अलग गौरी होती है। यह पृष्ठ यह भी दर्शाता है कि कौन सा काल राहु काल के दौरान आता है — एक अशुभ अवधि जो शुभ गौरी काल को भी प्रभावित करती है।

गौरी पंचांग का व्यापक उपयोग कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में दैनिक कार्यों और मुहूर्त चयन के लिए किया जाता है। यह उत्तर और पश्चिम भारत की चौघड़िया पद्धति के समान है, लेकिन इसके नाम और चक्र नियम दक्षिण भारतीय परंपरा पर आधारित हैं।

गौरी पंचांग की गणना कैसे होती है?

दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) को 8 बराबर भागों में और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को 8 बराबर भागों में बांटा जाता है। ऋतु और स्थान के अनुसार दिन-रात की लंबाई बदलती है, इसलिए काल की अवधि वर्ष भर बदलती रहती है।

प्रत्येक वार के लिए एक निर्धारित प्रारंभिक गौरी प्रकार होता है, और शेष सात एक निश्चित चक्रीय क्रम में आते हैं। इसलिए किसी निश्चित समय-सारिणी पर निर्भर रहने के बजाय प्रतिदिन गौरी पंचांग देखना आवश्यक है।

8 गौरी प्रकार

शुभ काल (5 प्रकार)

अमिर्धा (Best) — अमृत, सर्वाधिक शुभ; सभी महत्वपूर्ण कार्यों के लिए आदर्श। धनम् (Wealth) — समृद्धि; आर्थिक मामलों और निवेश के लिए सर्वोत्तम। लाबम् (Gain) — लाभ; व्यापार और सौदों के लिए। सुगम् (Good) — सुख-सुविधा; यात्रा और आराम के लिए। उथि (Good) — प्रगति; नए कार्य और करियर में उन्नति के लिए।

अशुभ काल (3 प्रकार)

रोगम् (Evil) — रोग; स्वास्थ्य संबंधी निर्णयों से बचें। सोरम् (Bad) — खतरा और चोरी; नई शुरुआत और मूल्यवान लेनदेन से बचें। विषम् (Bad) — विष और संघर्ष; महत्वपूर्ण निर्णय, बैठकें और समझौतों से बचें।

राहु काल का प्रभाव

शुभ गौरी काल में भी, यदि वह राहु काल से ओवरलैप करता है तो कार्यों से बचना चाहिए — राहु काल छाया ग्रह राहु द्वारा शासित एक दैनिक अशुभ अवधि है। प्रभावित काल को ऊपर राहु काल बैज से चिह्नित किया गया है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पारंपरिक पृष्ठभूमि

गौरी पंचांग की जड़ें कर्नाटक और तमिलनाडु की वाक्य और दृक् गणित पंचांगम् परंपराओं में हैं। 'गौरी' नाम देवी पार्वती (गौरी) को संदर्भित करता है, जो शुभत्व के दिव्य स्त्री सिद्धांत से इस पद्धति के संबंध को दर्शाता है। सदियों से दक्षिण भारतीय परिवार, पुरोहित और ज्योतिषी इसका उपयोग दैनिक एवं धार्मिक कार्यों के शुभ समय निर्धारण में करते रहे हैं।

आधुनिक व्यवहार में, गौरी पंचांग दक्षिण भारतीय दैनिक जीवन का अभिन्न अंग है। अनेक परिवार दिन आरंभ करने, खरीदारी या कार्यक्रम निर्धारित करने से पहले गौरी काल देखते हैं। कन्नड, तमिल और तेलुगु पंचांगम् में गौरी काल सारणी सदैव शामिल रहती है। केवल वार और सूर्योदय/सूर्यास्त की सरलता ने इसकी निरंतर प्रासंगिकता सुनिश्चित की है।