मुख्य सामग्री पर जाएं
Invalid year.
पंचांग सुविधाएं

Bengali Festival Calendar

सम्पूर्ण हिन्दू त्योहार कैलेंडर देखें। किसी भी वर्ष के सभी प्रमुख त्योहार, व्रत और महत्वपूर्ण तिथियाँ — पालन, उपवास और अनुष्ठानों के विवरण सहित।

वर्ष और स्थान चुनें

स्थानीय सूर्योदय के कारण त्योहार की तिथियाँ स्थान अनुसार भिन्न हो सकती हैं

आगे बढ़ने के लिए कृपया सुझावों में से एक स्थान चुनें

हिन्दू त्योहार कैलेंडर को समझें

हिन्दू त्योहार चन्द्र-सौर पंचांग पद्धति पर आधारित हैं, जिसमें तिथियाँ तिथि (चन्द्र दिवस), नक्षत्र, योग और कभी-कभी विशिष्ट ग्रहों की स्थिति के संयोजन से निर्धारित होती हैं। यही कारण है कि हिन्दू त्योहारों की तारीखें ग्रेगोरियन कैलेंडर में हर वर्ष बदलती रहती हैं — ये चन्द्रमा की कलाओं और सायन सूर्य स्थिति के अनुसार चलती हैं, न कि 365 दिनों के निश्चित सौर कैलेंडर के अनुसार। एक ही त्योहार ग्रेगोरियन कैलेंडर में एक वर्ष से दूसरे वर्ष 30-40 दिनों के अन्तर में कहीं भी आ सकता है।

हिन्दू पर्वों का विस्तार अत्यन्त व्यापक है: ऋतु परिवर्तन का उत्सव (संक्रान्ति, उगादि, पोंगल), विशिष्ट देवताओं का सम्मान (गणेश चतुर्थी, महाशिवरात्रि, नवरात्रि), पौराणिक घटनाओं का स्मरण (दशहरा, राम नवमी, जन्माष्टमी), आध्यात्मिक अनुशासन का पालन (एकादशी, प्रदोष व्रत, सोमवारी व्रत), और सामुदायिक बन्धनों को सुदृढ़ करना। अनेक त्योहारों में विशिष्ट क्षेत्रीय भिन्नताएँ हैं — नवरात्रि गुजरात में गरबा, बंगाल में दुर्गा पूजा पण्डालों और तमिलनाडु में गोलू के रूप में मनायी जाती है, फिर भी सभी एक ही पंचांग समय का पालन करते हैं।

त्योहार कैलेंडर में ऋतुओं, आहार और स्वास्थ्य से सम्बन्धित व्यावहारिक ज्ञान भी समाहित है। मकर संक्रान्ति सूर्य की उत्तरायण यात्रा का प्रतीक है और पारम्परिक रूप से अनेक क्षेत्रों में फसल कटाई से जुड़ी है। होली वसन्त ऋतु के आगमन का उत्सव है। नवरात्रि ऋतु संक्रमण काल में आती है जब आयुर्वेद विशेष आहार पद्धतियों की सिफारिश करता है। खगोल विज्ञान, पौराणिक कथाओं और व्यावहारिक जीवन ज्ञान का यह समन्वय हिन्दू त्योहार कैलेंडर को विश्व की सबसे परिष्कृत कालगणना प्रणालियों में से एक बनाता है।

हिन्दू पर्वों के प्रकार

प्रमुख त्योहार

दीवाली, होली, नवरात्रि, दशहरा और गणेश चतुर्थी जैसे भव्य सामुदायिक उत्सव। इनमें मन्दिर पूजा, सामुदायिक समारोह, विशेष पकवान, सजावट और सार्वजनिक अवकाश शामिल होते हैं। कुछ त्योहार कई दिनों तक चलते हैं।

व्रत (उपवास)

विशिष्ट पंचांग दिवसों से जुड़े नियमित आध्यात्मिक पालन: एकादशी (11वीं तिथि), प्रदोष व्रत (13वीं तिथि), चतुर्थी व्रत (4थी तिथि), सोमवारी (सोमवार) व्रत। इनमें वर्ष भर की आवर्ती तिथियों पर उपवास, प्रार्थना और विशिष्ट अनुष्ठान शामिल होते हैं।

क्षेत्रीय त्योहार

परम्परा-विशिष्ट उत्सव: पोंगल (तमिलनाडु), ओणम (केरल), बिहू (असम), गुड़ी पड़वा (महाराष्ट्र), उगादि (कर्नाटक/आन्ध्र), बैसाखी (पंजाब)। प्रत्येक स्थानीय संस्कृति, भाषा और कृषि चक्र को प्रतिबिम्बित करता है, साथ ही प्रायः समान पौराणिक मूल साझा करता है।

ज्योतिषीय पर्व

विशिष्ट ग्रह स्थितियों से जुड़े पर्व: गुरु पुष्य योग, रवि पुष्य, साढ़े साती संक्रमण, अष्टमी (8वीं तिथि) उत्सव। वैदिक ज्योतिषी और धर्मपरायण परिवार विशेष अनुष्ठानों के लिए इनका अनुसरण करते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न