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केरल के आँगन में ओणम का पूक्कलम, निलविलक्कु दीप और सद्या

ओणम

भगवान विष्णु

इस वर्ष
2 दिनों में
प्रमुख पर्व फसल पर्व
ओणम 2026 का मुख्य तिरुवोणम दिन 26 अगस्त 2026 (बुधवार) को है, जब मलयालम सौर माह चिंगम में तिरुवोणम अर्थात श्रवण नक्षत्र रहता है। यह केरल का फसल और घर-वापसी पर्व है, जिसमें पूक्कलम, ओणसद्या, नए वस्त्र और पारिवारिक मिलन से राजा महाबली का स्वागत किया जाता है।

यह कब पड़ता है

तिथि बदलती है क्योंकि यह चंद्रमा का अनुसरण करती है, ग्रेगोरियन कैलेंडर का नहीं।

2024 15 सित॰
रवि
2025 5 सित॰
शुक्र
2026 26 अग॰
बुध
2027 12 सित॰
रवि
2028 1 सित॰
शुक्र
2029 22 अग॰
बुध

भारत (IST) के लिए सटीक पंचांग गणना। दूर पूर्व या पश्चिम के स्थानों पर तिथि एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।

स्मरण, स्वागत और फसल का पर्व

ओणम केरल का बड़ा पर्व-काल है। यह अत्तम से शुरू होकर दसवें दिन तिरुवोणम पर अपने चरम पर पहुँचता है। यह मलयालम सौर पंचांग के पहले महीने चिंगम में, कठिन वर्षा-माह कर्किडकम के बाद और फसल के समय आता है। इसलिए इसकी तैयारी बहुत घरेलू और ठोस है: घर साफ होता है, भरपूर भोजन बनता है, दूर रहने वाले अपने लौटते हैं और अतिथि के लिए स्थान बनाया जाता है।

मुख्य कथा उदार असुर राजा महाबली को याद करती है, जिनके शासन को केरल के लोकगीत समृद्धि, समानता और अभाव से मुक्ति के समय के रूप में वर्णित करते हैं। वामन कथा में भगवान विष्णु बौने ब्राह्मण का रूप लेकर महाबली से तीन पग भूमि माँगते हैं। दो पग में पृथ्वी और आकाश नाप लेने पर महाबली तीसरे पग के लिए अपना सिर अर्पित करते हैं। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें वर्ष में एक बार अपनी प्रजा से मिलने की अनुमति मिलती है। द्वार का पूक्कलम और घर की सद्या एक ही भाव रखते हैं: प्रिय राजा को अपनी धरती समृद्ध और अपने लोग एक साथ दिखाई दें।

तिरुवोणम किसी चंद्र तिथि से तय नहीं होता। यह सौर-नक्षत्र पर्व है: चिंगम, अर्थात सूर्य के सिंह राशि में रहने वाले सौर माह में, तिरुवोणम नक्षत्र के प्रबल होने पर मुख्य दिन मनाया जाता है। अन्य पंचांगों में यही श्रवण नक्षत्र है। इसी कारण ग्रेगोरियन तिथि अगस्त या सितंबर में बदलती रहती है और केवल पूर्णिमा देखकर ओणम की सही तिथि नहीं निकाली जा सकती।

अनुष्ठान एवं परंपरा

ओणम के लिए कोई एक अनिवार्य घरेलू पूजा-पद्धति नहीं है। केरल के अलग-अलग क्षेत्रों में रीति बदलती है, पर मुख्य परंपराएँ घर तैयार करने, महाबली का स्वागत करने, फसल बाँटने और परिवार के साथ दिन बिताने पर केंद्रित हैं।

  • पूक्कलम बनाएँ: अत्तम पर छोटा फूल-सजावट आरंभ होती है और दस दिनों में बढ़ती जाती है। तिरुवोणम का पूरा पूक्कलम घर के द्वार पर महाबली का स्वागत करता है; कई परिवार बीच में वामन के प्रतीक त्रिक्काकरप्पन की मिट्टी की आकृति भी रखते हैं।
  • घर तैयार करें: घर और आँगन साफ करें, निलविलक्कु पारंपरिक दीप जलाएँ और ताज़ी सजावट रखें। यह तैयारी केवल सजावट नहीं, स्वागत का हिस्सा है।
  • ओणक्कोडी पहनें: परिवार के सदस्यों को नए वस्त्र दिए और मुख्य दिन पहने जाते हैं। यह घर में नई शुरुआत और सबके सम्मान को साझा करने का व्यावहारिक संकेत है।
  • ओणसद्या परोसें: केले के पत्ते पर चावल, अनेक सब्ज़ियाँ, अचार, चिप्स और पायसम वाली शाकाहारी सद्या परोसी जाती है। व्यंजनों की संख्या घर और क्षेत्र के अनुसार बदलती है; बढ़ा-चढ़ाकर गिनती दिखाने से अधिक महत्वपूर्ण उदारता और साथ बैठकर भोजन करना है।
  • महाबली और वामन का स्मरण करें: परिवार दीप, पूक्कलम या सद्या के सामने सरल अर्पण कर सकता है। मंदिर जाने वाले परिवार विशेष रूप से त्रिक्काकरा के विष्णु या वामन मंदिर में दर्शन कर सकते हैं।
  • उत्सव साझा करें: रिश्तेदारों से मिलना, उपहार, खेल, संगीत और स्थानीय कलाएँ ओणम का हिस्सा हैं। वल्लमकली नौका-दौड़, पुलिकली, कथकली और तिरुवातिराकली सार्वजनिक सांस्कृतिक उत्सव हैं; ये हर घर के लिए अनिवार्य पूजा नहीं हैं।

क्षेत्रीय विविधताएँ

केरल
दस दिनों का पर्व पूरे राज्य में मनाया जाता है, पर मलबार, मध्य केरल और त्रावणकोर की घरेलू रीति अलग हो सकती है। पूक्कलम, ओणसद्या, ओणक्कोडी और परिवार का मिलन सबसे व्यापक परंपराएँ हैं।
त्रिक्काकरा
कोच्चि के पास त्रिक्काकरा वामन मंदिर का ओणम की धार्मिक परंपरा में विशेष स्थान है। घर के पूक्कलम में रखी त्रिक्काकरप्पन की मिट्टी की आकृति भी वामन कथा से यही संबंध बनाती है।
प्रवासी मलयाली समुदाय
यदि वास्तविक तिरुवोणम कामकाजी दिन हो, तो विदेशों में मलयाली संगठन, मंदिर, चर्च, विद्यालय और कार्यस्थल अक्सर पास के सप्ताहांत में साझा पूक्कलम, सद्या और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करते हैं।
यह तिथि कैसे निर्धारित होती है

यह पर्व चंद्र पंचांग के अनुसार श्रवण के संयोग पर निर्धारित होता है।

तिथियाँ NASA/JPL की खगोलीय गणना से निकाली जाती हैं और पारंपरिक पंचांग के अनुरूप होती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 में ओणम कब है?
मुख्य दिन तिरुवोणम 26 अगस्त 2026 (बुधवार) को है। विस्तृत ओणम उत्सव तिरुवोणम से दस पर्व-दिन पहले अत्तम पर शुरू होता है।
ओणम की तिथि कैसे तय होती है?
ओणम मलयालम सौर पंचांग के अनुसार तय होता है। चिंगम माह में तिरुवोणम अर्थात श्रवण नक्षत्र के प्रबल होने पर मुख्य दिन मनाया जाता है। यह पूर्णिमा या किसी अन्य चंद्र तिथि से तय नहीं होता।
क्या ओणम केवल हिंदू धार्मिक पर्व है?
इसकी कथा और कई घरेलू रीति हिंदू परंपरा, विशेष रूप से महाबली और वामन की कथा, से जुड़ी हैं। केरल में ओणम व्यापक सांस्कृतिक और फसल पर्व भी है, जिसे विभिन्न समुदाय, विद्यालय, कार्यस्थल और दुनिया भर के मलयाली मिलकर मनाते हैं।
ओणम और तिरुवोणम में क्या अंतर है?
ओणम पूरे पर्व-काल का नाम है, जो परंपरा से अत्तम पर शुरू होता है। तिरुवोणम उसका दसवाँ और मुख्य दिन है, जिसका नाम तिथि तय करने वाले नक्षत्र से आता है। सामान्य बातचीत में लोग मुख्य तिरुवोणम दिन को भी केवल ओणम कहते हैं।
ओणसद्या में क्या होना चाहिए?
सद्या केले के पत्ते पर परोसा गया शाकाहारी भोजन है। इसमें सामान्यतः चावल, परिप्पु, सांभर, अवियल, थोरन या अन्य सब्ज़ियाँ, अचार, पापड़, केले के चिप्स और पायसम होते हैं। क्षेत्र और परिवार के अनुसार भोजन बदलता है; किसी निश्चित संख्या तक व्यंजन बनाना आवश्यक नहीं है।

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