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महाराष्ट्रीय घर में जरा-जीवंतिका का पारंपरिक चित्र, दीपक और पूजा की थाली

जीवंतिका पूजन

जरा-जीवंतिका

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4 दिनों में
व्रत दिवस
जीवंतिका पूजन महाराष्ट्र के अमांत श्रावण के प्रत्येक शुक्रवार को होता है। 2026 की तिथियाँ इस पृष्ठ पर हैं; परिवार जरा-जीवंतिका की पूजा करके बच्चों की सुरक्षा और कल्याण की प्रार्थना करते हैं, पर व्रत को स्वास्थ्य की गारंटी नहीं माना जाता।

2026 की तिथियाँ

एक मासिक व्रत — इस वर्ष इसकी तिथियाँ यहाँ दी गई हैं।

14 अग॰
शुक्र
21 अग॰
शुक्र
28 अग॰
शुक्र
4 सित॰
शुक्र
11 सित॰
शुक्र

भारत (IST) के लिए सटीक पंचांग गणना। दूर पूर्व या पश्चिम के स्थानों पर तिथि एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।

जरा-जीवंतिका पूजन का अर्थ

जीवंतिका पूजन श्रावण शुक्रवार का अनुष्ठान है जिसका केंद्र जरा-जीवंतिका हैं। महाराष्ट्रीय घरेलू परंपरा में उन्हें मातृ-संरक्षण से जोड़ा जाता है। माता-पिता, विशेषकर व्रत की परंपरागत विधि में माताएँ, बच्चों की सुरक्षा, कुशलता और पूर्ण जीवन के लिए प्रार्थना करते हैं।

घर के देवस्थान में रखा पारंपरिक जीवंतिका चित्र इसकी पहचान है, जिसमें अक्सर मातृ-आकृतियाँ और बच्चे दिखते हैं। यह चित्र प्रार्थना का दृश्य केंद्र है, पर पूजा चिकित्सा का विकल्प या अनहोनी न होने की गारंटी नहीं है। इसका भाव श्रद्धा, देखभाल और बच्चे के प्रति जिम्मेदारी है।

यह पूजा महाराष्ट्र के अमांत श्रावण के शुक्रवारों को दोहराई जाती है। कुछ घरों में पूरण का नैवेद्य, पूरण के दीप, आरती या बच्चों का सम्मान होता है और दूसरे घर सरल प्रार्थना करते हैं। इन स्थानीय विधियों को जोड़कर एक अनिवार्य सूची नहीं बनानी चाहिए।

अनुष्ठान एवं परंपरा

जीवंतिका पूजन घर में जरा-जीवंतिका के चित्र और बच्चों के लिए प्रार्थना के साथ होता है। नीचे दी गई बातें महाराष्ट्र की सामान्य रीतियाँ हैं, सभी के लिए अनिवार्य क्रम नहीं।

  • जीवंतिका चित्र की स्थापना: जरा-जीवंतिका का पारंपरिक कागज़ी या फ्रेम किया हुआ चित्र साफ देवस्थान में रखकर फूलों से सजाया जाता है।
  • दीप और पूजा: दीप, हल्दी-कुमकुम, फूल और घर में प्रचलित नैवेद्य अर्पित करके प्रार्थना की जाती है।
  • हर बच्चे का स्मरण: माता-पिता बच्चों की कुशलता की प्रार्थना करते हैं; बच्चा दूर हो तो कुछ घरों में आरती के समय उसका नाम लेकर स्मरण किया जाता है।
  • कुछ घरों में पूरण की रीति: महाराष्ट्र की कुछ परंपराओं में पूरण और पूरण के छोटे दीप बनाए जाते हैं, पर इसे एकमात्र मान्य विधि नहीं माना जाता।
  • प्रसाद और व्रत की पूर्णता: पूजा के बाद प्रसाद बाँटा जाता है और यदि व्रत रखा हो तो परिवार की रीति तथा स्वास्थ्य के अनुसार पूरा किया जाता है।

क्षेत्रीय विविधताएँ

महाराष्ट्र
जरा-जीवंतिका पूजन श्रावण शुक्रवार और बच्चों की सुरक्षा-कुशलता की प्रार्थना से गहराई से जुड़ा है। पारंपरिक जीवंतिका चित्र कई घरों में इसकी प्रमुख पहचान है।
घर-घर की अलग रीति
पूरण के दीप, आरती, भोजन-नियम, हल्दी-कुमकुम और वार्षिक जीवंतिका चित्र को रखने या बदलने की परंपरा परिवार के अनुसार अलग होती है। एक सामान्य ऑनलाइन सूची से अधिक महत्व घर की चली आ रही विधि का है।
यह तिथि कैसे निर्धारित होती है

यह पर्व चंद्र पंचांग के अनुसार श्रावण के संयोग पर निर्धारित होता है।

तिथियाँ NASA/JPL की खगोलीय गणना से निकाली जाती हैं और पारंपरिक पंचांग के अनुरूप होती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 में जीवंतिका पूजन की तिथियाँ कब हैं?
जीवंतिका पूजन महाराष्ट्र के अमांत श्रावण में आने वाले प्रत्येक शुक्रवार को होता है। 2026 की सभी तिथियाँ इस पृष्ठ के तिथि-भाग में दी गई हैं।
जीवंतिका पूजन में किसकी पूजा होती है?
यह पूजा जरा-जीवंतिका को समर्पित है, जिन्हें महाराष्ट्रीय घरेलू परंपरा में बच्चों की कुशलता और दीर्घ जीवन से जुड़ी मातृ-संरक्षक शक्ति के रूप में स्मरण किया जाता है।
जीवंतिका व्रत कौन रखता है?
परंपरागत रूप से माताएँ इस व्रत से विशेष रूप से जुड़ी हैं, लेकिन पूरा परिवार बच्चों के लिए प्रार्थना और पूजा में भाग ले सकता है। औपचारिक पूजा कौन करे, यह घर की रीति तय करती है।
जीवंतिका का कागज़ क्या है?
यह जरा-जीवंतिका पूजा का पारंपरिक चित्रित पत्र है, जिसमें प्रायः मातृ-आकृतियाँ और बच्चे दिखते हैं। उसका स्वरूप और उसे रखने या हर वर्ष बदलने की रीति परिवार के अनुसार अलग होती है।
क्या जीवंतिका पूजन बच्चे के स्वास्थ्य या आयु की गारंटी देता है?
नहीं। यह सुरक्षा और कल्याण की भक्तिपूर्ण प्रार्थना है, चिकित्सा या निश्चित परिणाम का दावा नहीं। सामान्य देखभाल, सुरक्षा और आवश्यक पेशेवर स्वास्थ्य-सेवा जरूरी रहती है।

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