उगादी
यह कब पड़ता है
तिथि बदलती है क्योंकि यह चंद्रमा का अनुसरण करती है, ग्रेगोरियन कैलेंडर का नहीं।
भारत (IST) के लिए सटीक पंचांग गणना। दूर पूर्व या पश्चिम के स्थानों पर तिथि एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।
महत्व और कथा
उगादी आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में पालन की जाने वाली चांद्र गणना के अनुसार नववर्ष का आरंभ है। यह नाम युग (काल) और आदि (आरंभ) से बना है — एक नए चक्र का आरंभ। यह चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को पड़ता है, प्रथम चांद्र मास के शुक्ल पक्ष का पहला दिन, जब वसंत की फसलें आ चुकी होती हैं और पुराने वर्ष को समाप्त माना जाता है।
परंपरा के अनुसार इसी दिन सृष्टि का आरंभ हुआ माना जाता है, और यही वह दिन है जिसे कई पुराने पंचांग आने वाले वर्ष के प्रारंभ-बिंदु के रूप में लेते हैं। साठ वर्षों के चक्र में प्रत्येक वर्ष का अपना नाम होता है। परिवार इस दिन का उपयोग बीते वर्ष का लेखा-जोखा करने और आरंभ हो रहे वर्ष का स्वागत करने में करते हैं।
सबसे विशिष्ट रीति उगादी पच्चड़ी है, एक छोटा व्यंजन जो छह स्वादों को मिलाता है — कड़वाहट के लिए नीम के फूल, मिठास के लिए गुड़, खटास के लिए इमली, नमक, तीखेपन के लिए कच्चा आम, और गर्मी के लिए मिर्च। सबसे पहले इसे खाया जाता है, जो यह सरल स्मरण कराता है कि आने वाला वर्ष इन सबको अपने में समेटे रहेगा — इनमें से चुनने के बजाय इन्हें एक साथ स्वीकार करते हुए।
अनुष्ठान एवं परंपरा
उगादी कैसे मनाई जाती है:
- दिन का आरंभ प्रायः सूर्योदय से पहले तेल स्नान और नए या ताज़े वस्त्रों के साथ होता है, जो वर्ष की एक स्वच्छ शुरुआत का प्रतीक है।
- उगादी पच्चड़ी बनाई जाती है और सबसे पहले खाई जाती है — एक ही व्यंजन जो छहों स्वादों (कड़वा, मीठा, खट्टा, नमकीन, चटपटा और तीखा) को मिलाता है, यह स्मरण कराते हुए कि वर्ष इन सबको समेटे रहेगा।
- द्वारों को आम के पत्तों (तोरणम्) और रंगोली से सजाया जाता है; पहले के दिनों में घरों की अच्छी तरह सफ़ाई की जाती है।
- अनेक लोग पंचांग श्रवणम् में सम्मिलित होते हैं — मंदिर में नववर्ष के पंचांग का सार्वजनिक वाचन, जहाँ पुरोहित वर्षा, फसल और आने वाले महीनों का पूर्वानुमान बताते हैं।
- परिवार उत्सव का भोजन बनाते हैं, प्रायः पुलिहोरा (इमली चावल), बोब्बट्लु/होलिगे (मीठी भरी रोटी) और मौसमी आम के साथ।
क्षेत्रीय विविधताएँ
यह तिथि कैसे निर्धारित होती है
यह पर्व चंद्र पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के संयोग पर निर्धारित होता है।
तिथियाँ NASA/JPL की खगोलीय गणना से निकाली जाती हैं और पारंपरिक पंचांग के अनुरूप होती हैं।