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Mahesh Navami

Lord Shiva (Mahesh)

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महेश नवमी 2026 Tuesday, 23 June 2026 (Tuesday) को है, जो शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि (ज्येष्ठ शुक्ल नवमी) है। यह माहेश्वरी समाज का स्थापना दिवस है, जिसे परंपरा के अनुसार भगवान महेश (शिव) और माता पार्वती ने नाम तथा नया जीवन दिया, और इसे शिव-पार्वती पूजन, सामुदायिक शोभायात्राओं तथा बुजुर्गों एवं समाज के इतिहास के सम्मान के साथ मनाया जाता है।

यह कब पड़ता है

तिथि बदलती है क्योंकि यह चंद्रमा का अनुसरण करती है, ग्रेगोरियन कैलेंडर का नहीं।

2024 जून 15
शनि
2025 जून 4
बुध
2026 जून 23
मंगल
2027 जून 12
शनि
2028 जून 1
गुरु
2029 जून 20
बुध

भारत (IST) के लिए सटीक पंचांग गणना। दूर पूर्व या पश्चिम के स्थानों पर तिथि एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।

महत्व और कथा

महेश नवमी माहेश्वरी समाज का स्थापना दिवस (स्थापना दिवस) है, जो मारवाड़ी और राजस्थानी मूल का एक वैश्य व्यापारी समाज है, जो अब समूचे भारत में फैला हुआ है। यह ज्येष्ठ शुक्ल नवमी, अर्थात् ज्येष्ठ के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को पड़ती है, जो प्रायः मई या जून में आती है, और समाज के लिए वर्ष का सर्वाधिक महत्वपूर्ण दिन है।

इस दिन के पीछे की परंपरा बताती है कि समाज की उत्पत्ति कैसे हुई। इस कथा के अनुसार उसके पूर्वज क्षत्रिय मार्ग पर चलते थे और एक गंभीर संकट में पड़ गए, जिससे उन्हें भगवान महेश (शिव) और माता पार्वती ने आशीर्वाद देकर नया जीवन दिया। देवताओं ने उन्हें महेश के नाम पर माहेश्वरी नाम दिया और उन्हें युद्ध के मार्ग से मोड़कर व्यापार तथा अहिंसा पर आधारित जीवन की ओर प्रवृत्त किया। यह दिन उसी मोड़ और उससे समाज को मिली उत्पत्ति का स्मरण कराता है।

इसी कारण महेश नवमी भक्ति के साथ-साथ सामुदायिक पहचान का भी दिन है। यह शिव और पार्वती की पूजा को समाज के इतिहास तथा उन मूल्यों के स्मरण से जोड़ती है जिन्हें वह उसी उत्पत्ति से ग्रहण करता है। समूचे भारत में माहेश्वरी परिवार और संगठन भगवान महेश का सम्मान करने, अपने साझा अतीत को स्मरण करने, और पूजन, मिलन तथा सेवा के माध्यम से समाज के बंधनों को नवीन करने हेतु एकत्र होते हैं।

अनुष्ठान एवं परंपरा

अनुष्ठान महेश तथा पार्वती की पूजा को सामुदायिक मिलन और स्मरण से जोड़ता है। सामान्य प्रथाओं में निम्नलिखित हैं:

  • महेश वंदना और शिव-पार्वती पूजन: दिन का आरंभ महेश वंदना और भगवान महेश (शिव) तथा माता पार्वती के पूजन से होता है, जिसमें उन देवताओं का सम्मान किया जाता है जिन्होंने समाज को जीवन और नाम दिया माना जाता है।
  • सामुदायिक मिलन (स्नेह-मिलन): माहेश्वरी परिवार और संगठन ऐसे मिलन समारोहों (स्नेह-मिलन) में एकत्र होते हैं जो समाज के बंधनों को नवीन करते हैं और उसके सदस्यों को एक स्थान पर लाते हैं।
  • शोभायात्राएँ: अनेक नगरों में यह दिन भगवान महेश के सम्मान में एक शोभायात्रा के साथ चिह्नित होता है, जिसमें समाज तथा उसके सदस्य सम्मिलित होते हैं।
  • बुजुर्गों और इतिहास का सम्मान: बुजुर्गों का सम्मान किया जाता है और समाज की उत्पत्ति तथा इतिहास का स्मरण होता है, ताकि स्थापना दिवस का अर्थ आगे संप्रेषित होता रहे।
  • सांस्कृतिक कार्यक्रम: संगीत, प्रस्तुतियाँ और सांस्कृतिक आयोजन मिलन को एक साथ लाते हैं और इस दिन को एक साझा अवसर के रूप में चिह्नित करते हैं।
  • समाज-सेवा और दान: यह दिन समाज-सेवा और दान की गतिविधियों की ओर भी मुड़ता है, जो अहिंसा पर आधारित व्यापार की समाज की परंपरा के अनुरूप है।

क्षेत्रीय विविधताएँ

समूचे भारत में माहेश्वरी समाज
महेश नवमी माहेश्वरी समाज द्वारा जहाँ भी वह बसा है वहाँ मनाई जाती है, उसके मारवाड़ी और राजस्थानी मूल से लेकर समूचे भारत के नगरों तक। स्थानीय संगठन महेश तथा पार्वती का पूजन, स्नेह-मिलन समारोह, और सांस्कृतिक एवं परोपकारी कार्यक्रम आयोजित करते हैं।
राजस्थान और पश्चिमी भारत
राजस्थान और पश्चिमी भारत में, जहाँ समाज अपनी उत्पत्ति का आधार पाता है, यह दिन उसकी संस्थापन-कथा पर विशेष ध्यान के साथ मनाया जाता है, जो शिव-पार्वती पूजन को समाज के इतिहास तथा मूल्यों के स्मरण से जोड़ता है।
यह तिथि कैसे निर्धारित होती है

Observed on the Navami tithi of Jyeshtha (Shukla paksha), reckoned by sunrise (udaya tithi).

तिथियाँ NASA/JPL की खगोलीय गणना से निकाली जाती हैं और पारंपरिक पंचांग के अनुरूप होती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 में महेश नवमी कब है?
महेश नवमी 2026 Tuesday, 23 June 2026 (Tuesday) को है। यह शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि (ज्येष्ठ शुक्ल नवमी) को मनाई जाती है, यही कारण है कि यह किसी निश्चित कैलेंडर तिथि के बजाय प्रायः मई या जून में पड़ती है।
हर वर्ष तिथि क्यों बदलती है?
यह दिन हिंदू चंद्र कैलेंडर का अनुसरण करता है, ग्रेगोरियन का नहीं। यह ज्येष्ठ शुक्ल नवमी से निर्धारित होता है, और चूँकि चंद्र तथा सौर कैलेंडर ठीक-ठीक मेल नहीं खाते, इसलिए इससे मिलती-जुलती अंग्रेज़ी-कैलेंडर तिथि हर वर्ष बदलती रहती है, जो प्रायः मई और जून के भीतर ही रहती है।
महेश नवमी क्या है?
महेश नवमी माहेश्वरी समाज का स्थापना दिवस है, जो मारवाड़ी और राजस्थानी मूल का एक वैश्य व्यापारी समाज है। परंपरा के अनुसार समाज के पूर्वजों को भगवान महेश (शिव) और माता पार्वती ने नया जीवन तथा उनका नाम दिया, और यह दिन उसी उत्पत्ति का स्मरण पूजन और सामुदायिक मिलन के साथ कराता है।
समाज को माहेश्वरी क्यों कहा जाता है?
परंपरा के अनुसार भगवान महेश (शिव) और माता पार्वती ने समाज को नया जीवन देकर महेश के नाम पर उसका नाम माहेश्वरी रखा, जब उन्होंने उसके पूर्वजों को क्षत्रिय मार्ग से मोड़कर व्यापार तथा अहिंसा की ओर प्रवृत्त किया। नाम और यह दिन दोनों उसी उत्पत्ति-कथा से जुड़े हैं।
महेश नवमी कैसे मनाई जाती है?
यह दिन भगवान महेश (शिव) और माता पार्वती की पूजा को सामुदायिक मिलन (स्नेह-मिलन), शोभायात्राओं, बुजुर्गों के सम्मान, सांस्कृतिक कार्यक्रमों तथा समाज-सेवा एवं दान के कार्यों से जोड़ता है। यह भक्ति के साथ-साथ सामुदायिक पहचान और स्मरण का भी दिन है।

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