Kumar Shashthi
Lord Kartikeya (Skanda)
यह कब पड़ता है
तिथि बदलती है क्योंकि यह चंद्रमा का अनुसरण करती है, ग्रेगोरियन कैलेंडर का नहीं।
भारत (IST) के लिए सटीक पंचांग गणना। दूर पूर्व या पश्चिम के स्थानों पर तिथि एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।
कुमार षष्ठी का अर्थ
कुमार षष्ठी आषाढ़ के शुक्ल पक्ष की छठी तिथि (षष्ठी) को, प्रायः जून या जुलाई में आती है। यह दिन भगवान कार्तिकेय को समर्पित है, जो शिव और पार्वती के पुत्र तथा देवताओं की सेना के सेनापति हैं। उन्हें स्कंद और कुमार भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है युवा, और छठी तिथि उनका विशेष दिन मानी जाती है, इसीलिए एक षष्ठी उनकी पूजा के लिए नियत है।
कार्तिकेय वीरता, अनुशासन और रक्षा के देवता के रूप में पूजे जाते हैं, और इस दिन भक्त उन्हें स्कंद कुमार, कठिनाई के सामने साहस को स्थिर करने वाले युवा सेनापति, के रूप में स्मरण करते हैं। व्रत का केंद्र उनकी पूजा है, जिसमें कुछ भक्त उपवास भी रखते हैं, और शक्ति, रक्षा तथा उद्देश्य की स्पष्टता की प्रार्थना है। इस दिन का भाव उत्सवी के बजाय शांत और भक्तिमय रहता है, जिसे घर में और कार्तिकेय को समर्पित मंदिरों में रखा जाता है।
इस दिन को मिलते-जुलते नामों वाले अन्य दिनों से अलग समझना उचित है। कुमार षष्ठी विशेष रूप से कार्तिकेय की आषाढ़ शुक्ल षष्ठी की पूजा है। यह चंपा षष्ठी, खंडोबा (शिव के एक रूप) का मार्गशीर्ष का पर्व, के समान नहीं है, और न ही बंगाल में रखी जाने वाली ज्येष्ठ अरण्य षष्ठी या जामाई षष्ठी के समान है। इन सबमें, यह छठी तिथि और कार्तिकेय से उसका संबंध ही कुमार षष्ठी को उसका विशेष अर्थ देता है।
अनुष्ठान एवं परंपरा
कुमार षष्ठी कार्तिकेय की पूजा तथा साहस और रक्षा की प्रार्थना को समर्पित एक शांत, भक्तिमय दिन है। रीति-रिवाज़ परिवार और क्षेत्र के अनुसार भिन्न होते हैं।
- कार्तिकेय की पूजा: कार्तिकेय (स्कंद) के चित्र या मूर्ति का पूजन फूलों, धूप और दीपों से किया जाता है, और उन्हें एक रक्षक तथा वीरता के देवता के रूप में प्रार्थना अर्पित की जाती है।
- उपवास रखना: कुछ भक्त संकल्प के अंग के रूप में दिन भर उपवास रखते हैं, जिसका स्वरूप व्यक्ति की सुरक्षित क्षमता के अनुसार ढाला जाता है।
- रक्षा की प्रार्थना: भक्त कार्तिकेय से साहस, स्थिरता, संकट से रक्षा, और कठिनाई का सामना निर्भय होकर करने के अनुशासन की प्रार्थना करते हैं।
- मंदिर दर्शन: जहाँ कार्तिकेय को समर्पित मंदिर हैं, वहाँ भक्त उनकी इस विशेष छठी तिथि पर दर्शन और पूजा के लिए जुटते हैं।
- भोग और प्रसाद: देवता के समक्ष भोग अर्पित किया जाता है और बाद में प्रसाद के रूप में बाँटा जाता है, जिससे दिन का सरल, घर-केंद्रित व्रत पूर्ण होता है।
क्षेत्रीय विविधताएँ
यह तिथि कैसे निर्धारित होती है
Observed on the Shashthi tithi of Ashadha (Shukla paksha), reckoned by sunrise (udaya tithi).
तिथियाँ NASA/JPL की खगोलीय गणना से निकाली जाती हैं और पारंपरिक पंचांग के अनुरूप होती हैं।