छठ पूजा
Surya (Sun God), Chhathi Maiya
यह कब पड़ता है
तिथि बदलती है क्योंकि यह चंद्रमा का अनुसरण करती है, ग्रेगोरियन कैलेंडर का नहीं।
भारत (IST) के लिए सटीक पंचांग गणना। दूर पूर्व या पश्चिम के स्थानों पर तिथि एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।
महत्व और कथा
छठ उन कुछ पर्वों में से एक है जो सीधे सूर्य को और छठी मैया को समर्पित है, जिन्हें उस देवी का रूप माना जाता है जो बच्चों की रक्षा करती हैं और उनके कल्याण का ध्यान रखती हैं। इसका कारण स्पष्ट है: सूर्य ऊष्मा, फसल और स्वास्थ्य का प्रत्यक्ष स्रोत है, और छठ इसके लिए वर्ष का औपचारिक धन्यवाद है। यह पर्व एक संध्या को अस्त होते सूर्य का और अगली सुबह उगते सूर्य का — दोनों का सम्मान करता है — आने वाले दिन की प्रार्थना से पहले बीत रहे दिन के प्रति कृतज्ञता।
इसके केंद्र में जो व्रत है, वह कठिन है। मुख्य व्रती (व्रती, प्रायः घर की कोई स्त्री) लगभग छत्तीस घंटे का निर्जला व्रत (निर्जला) रखती हैं, पूरे एक दिन-रात न अन्न लेती हैं और न जल। न कोई मंदिर होता है और न कोई पुजारी — यह अनुष्ठान परिवार द्वारा जल के किनारे संपन्न होता है, और यही एक कारण है कि जिन समुदायों में यह मनाया जाता है, वहाँ इसका इतना व्यक्तिगत महत्व है।
यह अपनी अत्यंत स्वच्छता और तैयारी की कठोरता के लिए भी जाना जाता है, जहाँ प्रसाद शुद्धता के कठोर नियमों के अनुसार पकाया जाता है। इसका भाव उत्सव से अधिक अनुशासित भक्ति का होता है: लोग इसके लिए अपने पैतृक घरों और नदी-घाटों पर लौटते हैं, और बिहार तथा पूर्वी क्षेत्र में इसे प्रायः वर्ष का सबसे महत्वपूर्ण पर्व कहा जाता है, दीवाली से भी बढ़कर।
अनुष्ठान एवं परंपरा
चार दिन किस प्रकार मनाए जाते हैं:
- पहला दिन — नहाय खाय: व्रती स्नान करती हैं, प्रायः नदी में, और शुद्धता की अवधि आरंभ करने के लिए एक सरल, सात्विक भोजन ग्रहण करती हैं।
- दूसरा दिन — खरना: दिन भर का व्रत, जो सूर्यास्त के बाद खीर और रोटी से तोड़ा जाता है; यह भोजन समाप्त होते ही लंबा निर्जला व्रत (निर्जला) आरंभ हो जाता है।
- तीसरा दिन — संध्या अर्घ्य: परिवार साँझ को नदी या तालाब पर एकत्र होता है और जल में खड़े होकर अस्त होते सूर्य को जल और फल (अर्घ्य) अर्पित करता है — यह पर्व का दृश्य केंद्र है।
- चौथा दिन — उषा अर्घ्य: भोर से पहले लोग लौटकर उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं; इसके बाद ही व्रत अंततः तोड़ा जाता है (पारण)।
- प्रसाद का केंद्र ठेकुआ (गेहूँ और गुड़ से बना पका हुआ मीठा पकवान), मौसमी फल और गन्ना होता है, जिसे बाँस की चपटी टोकरियों (सूप और दौरा) में जल तक ले जाया जाता है।
- रातभर छठी मैया के लोकगीत गाए जाते हैं, और कई लोग व्रत के अंग के रूप में नंगे पैर घाट तक जाते हैं।
क्षेत्रीय विविधताएँ
यह तिथि कैसे निर्धारित होती है
Observed on the Shashthi tithi of Kartik (Shukla paksha), reckoned by sunrise (udaya tithi). Should the tithi fall across two days, tradition keeps the earlier day (purva-viddha).
तिथियाँ NASA/JPL की खगोलीय गणना से निकाली जाती हैं और पारंपरिक पंचांग के अनुरूप होती हैं।