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श्रावण बुधवार की पूजा के लिए सजे पीतल के दीपक, घंटी, फूल और हरे पूजा-वस्त्र

बुध पूजन

बुध देव

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2 दिनों में
व्रत दिवस
बुध पूजन महाराष्ट्र के अमांत श्रावण मास के प्रत्येक बुधवार को किया जाता है। 2026 की सभी तिथियाँ इस पृष्ठ पर एक साथ दी गई हैं; भक्त बुध की सरल घरेलू पूजा करते हैं और मंत्र, नैवेद्य तथा व्रत की विधि अपने परिवार की परंपरा के अनुसार रखते हैं।

2026 की तिथियाँ

एक मासिक व्रत — इस वर्ष इसकी तिथियाँ यहाँ दी गई हैं।

19 अग॰
बुध
26 अग॰
बुध
2 सित॰
बुध
9 सित॰
बुध

भारत (IST) के लिए सटीक पंचांग गणना। दूर पूर्व या पश्चिम के स्थानों पर तिथि एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।

श्रावण में बुध पूजन का अर्थ

महाराष्ट्र की श्रावण परंपरा में सप्ताह के हर दिन से एक उपासना जुड़ी है। बुधवार को बुध पूजन किया जाता है—बुधवार नाम जिस ग्रह बुध से जुड़ा है, उसकी आराधना। यह श्रावण सोमवार, मंगला गौरी, बृहस्पति पूजन, जीवंतिका पूजन, अश्वत्थ मारुति पूजन और आदित्य पूजन के साथ महीने की साप्ताहिक साधना का भाग है।

यह सामान्यतः बड़े सार्वजनिक उत्सव के बजाय घर में होने वाली संक्षिप्त पूजा है। परिवार देवस्थान साफ करके दीप जला सकता है, फूल या साधारण नैवेद्य चढ़ा सकता है और अपनी परंपरा से मिला पाठ या व्रत-कथा पढ़ सकता है। सभी महाराष्ट्रीय परिवारों के लिए एक ही पूजा-सामग्री या उपवास-विधि अनिवार्य नहीं है।

इस पृष्ठ की तिथियाँ महाराष्ट्र के अमांत श्रावण के अनुसार हैं, जो अमावस्या के बाद आरंभ होता है। उत्तर भारत के पूर्णिमांत कैलेंडर में सावन की सीमा अलग होती है, इसलिए वहाँ की बुधवार सूची कुछ अलग नागरिक तिथियों से शुरू या समाप्त हो सकती है।

अनुष्ठान एवं परंपरा

बुध पूजन प्रायः बुधवार की सरल घरेलू उपासना है। व्रत रखना है, केवल पूजा करनी है या दोनों—यह परिवार की परंपरा तय करती है।

  • देवस्थान की तैयारी: पूजा-स्थान और पात्र साफ करके बुध के लिए दीप और फूल सजाए जाते हैं।
  • सरल संकल्प: भक्त श्रावण बुधवार की इस पूजा को ध्यान और संयम से पूरा करने का संकल्प लेते हैं।
  • दीप, फूल और नैवेद्य: परिवार में प्रचलित सामग्री चढ़ाई जाती है; किसी एक वस्तु को हर घर के लिए अनिवार्य नहीं माना जाता।
  • प्रार्थना या व्रत-कथा: बुध के नाम, परिचित स्तोत्र या घर में पढ़ी जाने वाली बुधवार व्रत-कथा का पाठ किया जा सकता है।
  • पूजा की पूर्णता: प्रसाद बाँटा जाता है और यदि उपवास रखा हो तो स्वास्थ्य तथा घर की रीति के अनुसार उसे पूरा किया जाता है।

क्षेत्रीय विविधताएँ

महाराष्ट्र (अमांत श्रावण)
अमांत श्रावण के भीतर आने वाले बुधवारों को बुध की पूजा की जाती है। यह महीने के बड़े पर्वों की तुलना में शांत और घरेलू परंपरा है।
परिवार और स्थानीय परंपराएँ
कुछ परंपराएँ बुधवार को बुध-बृहस्पति व्रत-चक्र से जोड़ती हैं, जबकि अन्य घरों में बुधवार को बुध और गुरुवार को बृहस्पति की अलग पूजा होती है। परिवार से मिली विधि को सामान्य इंटरनेट सूची से बदलना आवश्यक नहीं है।
यह तिथि कैसे निर्धारित होती है

यह पर्व चंद्र पंचांग के अनुसार श्रावण के संयोग पर निर्धारित होता है।

तिथियाँ NASA/JPL की खगोलीय गणना से निकाली जाती हैं और पारंपरिक पंचांग के अनुरूप होती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 में बुध पूजन की तिथियाँ कब हैं?
बुध पूजन महाराष्ट्र के अमांत श्रावण मास में आने वाले प्रत्येक बुधवार को होता है। 2026 की सभी तिथियाँ इस पृष्ठ के तिथि-भाग में दी गई हैं।
बुध पूजन में किसकी पूजा होती है?
यह पूजा बुधवार से जुड़े ग्रह बुध को समर्पित है। यह महाराष्ट्र की उस श्रावण परंपरा का भाग है जिसमें सप्ताह के हर दिन की एक विशेष उपासना होती है।
क्या बुध पूजन बड़ा सार्वजनिक त्योहार है?
यह सामान्यतः बड़े सार्वजनिक उत्सव के बजाय घर की शांत पूजा है। इसका महत्व पूरे श्रावण में हर सप्ताह दोहराई जाने वाली साधना में है।
क्या श्रावण बुधवार को उपवास अनिवार्य है?
एक ही नियम सबके लिए लागू नहीं होता। कुछ परिवार व्रत या सादा भोजन रखते हैं और कुछ केवल पूजा करते हैं। स्वास्थ्य और घर की स्थापित परंपरा को प्राथमिकता दें।
बुध पूजन की तिथियाँ उत्तर भारतीय सावन से अलग क्यों हो सकती हैं?
महाराष्ट्र में अमांत मास अमावस्या के बाद शुरू होता है, जबकि कई उत्तर भारतीय कैलेंडर पूर्णिमांत सीमा मानते हैं। इसलिए श्रावण या सावन में गिने जाने वाले बुधवार अलग हो सकते हैं।

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