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पीत पुष्प, प्रार्थना-पुस्तक, पीले वस्त्र और पीतल के दीपक से सजा घरेलू देवस्थान

बृहस्पति पूजन

बृहस्पति देव

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3 दिनों में
व्रत दिवस
बृहस्पति पूजन महाराष्ट्र के अमांत श्रावण के प्रत्येक गुरुवार को किया जाता है। 2026 की सभी तिथियाँ इस पृष्ठ पर हैं; भक्त प्रार्थना और सरल घरेलू पूजा से बृहस्पति का सम्मान करते हैं, जबकि नैवेद्य और व्रत की रीति परिवार के अनुसार बदलती है।

2026 की तिथियाँ

एक मासिक व्रत — इस वर्ष इसकी तिथियाँ यहाँ दी गई हैं।

13 अग॰
गुरु
20 अग॰
गुरु
27 अग॰
गुरु
3 सित॰
गुरु
10 सित॰
गुरु

भारत (IST) के लिए सटीक पंचांग गणना। दूर पूर्व या पश्चिम के स्थानों पर तिथि एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।

श्रावण गुरुवार को बृहस्पति की पूजा क्यों होती है

गुरुवार को बृहस्पतिवार या गुरुवार भी कहा जाता है और यह बृहस्पति, देवताओं के गुरु, से जुड़ा है। महाराष्ट्र के पारंपरिक श्रावण कैलेंडर में महीने के प्रत्येक गुरुवार को बृहस्पति पूजन होता है, इसलिए यह एक दिन का वार्षिक पर्व नहीं बल्कि दोहराई जाने वाली घरेलू उपासना है।

इस पूजा का भाव गुरु, ज्ञान, सही सलाह और पारिवारिक कर्तव्य में स्थिरता से जुड़ा है। ये परंपरागत प्रार्थना-विषय हैं, निश्चित भौतिक परिणाम नहीं। कोई घर संक्षिप्त पूजा करता है तो कोई अपनी परंपरा के अनुसार विस्तृत व्रत रखता है।

इस पृष्ठ की श्रृंखला महाराष्ट्र के अमांत श्रावण के अनुसार है। उत्तर भारत के पूर्णिमांत सावन की शुरुआत और समाप्ति अलग नागरिक तिथियों पर होती है, इसलिए उसी मास-नाम में आने वाले गुरुवारों की सूची अलग हो सकती है।

अनुष्ठान एवं परंपरा

बृहस्पति पूजन कहीं संक्षिप्त घरेलू प्रार्थना है और कहीं पारिवारिक व्रत। इसका सामान्य केंद्र श्रद्धापूर्वक गुरुवार की पूजा है; बाकी विधि घर के अनुसार बदलती है।

  • देवस्थान की व्यवस्था: दीप, फूल, जल और परिवार की सामान्य पूजा-सामग्री घर के देवस्थान में रखी जाती है।
  • बृहस्पति का गुरु रूप स्मरण: प्रार्थना में बृहस्पति को देवगुरु और गुरुवार से जुड़े ग्रह के रूप में सम्मान दिया जाता है।
  • फूल और नैवेद्य: कई घरों में पीले फूल या पीले रंग का साधारण नैवेद्य रखा जाता है, पर यह सर्वमान्य अनिवार्यता नहीं है।
  • पाठ या जप: परिवार में प्रचलित बृहस्पति प्रार्थना, स्तोत्र या गुरुवार व्रत-कथा पढ़ी जा सकती है।
  • क्षमता के अनुसार भोजन-व्रत: व्रत रखने वाले घर की विधि से उसे पूरा करते हैं; अन्य भक्त बिना उपवास के पूजा करते हैं।

क्षेत्रीय विविधताएँ

महाराष्ट्र (अमांत श्रावण)
अमांत श्रावण के भीतर आने वाले गुरुवारों को बृहस्पति पूजन किया जाता है। यह सप्ताह के हर दिन से उपासना जोड़ने वाली पुरानी श्रावण परंपरा का भाग है।
भारत की गुरुवार परंपराएँ
बृहस्पति या गुरु की गुरुवार पूजा अन्य क्षेत्रों में भी मिलती है, लेकिन श्रावण-विशेष श्रृंखला, भोजन-नियम, कथा और सामग्री क्षेत्र तथा कुल-परंपरा के अनुसार बदलती है।
यह तिथि कैसे निर्धारित होती है

यह पर्व चंद्र पंचांग के अनुसार श्रावण के संयोग पर निर्धारित होता है।

तिथियाँ NASA/JPL की खगोलीय गणना से निकाली जाती हैं और पारंपरिक पंचांग के अनुरूप होती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 में बृहस्पति पूजन की तिथियाँ कब हैं?
यह महाराष्ट्र के अमांत श्रावण में आने वाले प्रत्येक गुरुवार को होता है। 2026 की पूरी श्रृंखला इस पृष्ठ के तिथि-भाग में दी गई है।
बृहस्पति कौन हैं?
बृहस्पति देवताओं के गुरु माने जाते हैं और गुरुवार, जिसे बृहस्पतिवार भी कहते हैं, से जुड़े ग्रह हैं।
बृहस्पति पूजन किस उद्देश्य से किया जाता है?
भक्त ज्ञान, सही सलाह, अनुशासित अध्ययन और कर्तव्य में स्थिरता के लिए प्रार्थना करते हैं। ये भक्तिभाव हैं, निश्चित परिणाम का वादा नहीं।
क्या पीले वस्त्र या पीला भोजन अनिवार्य है?
नहीं। कुछ गुरुवार परंपराओं में पीले फूल, वस्त्र या भोजन सामान्य हैं, पर सामग्री और भोजन-विधि परिवार के अनुसार होती है।
क्या श्रावण गुरुवार को पूरा उपवास रखना आवश्यक है?
हर घर में नहीं। कुछ भक्त व्रत रखते हैं, कुछ सादा भोजन लेते हैं और कुछ केवल पूजा करते हैं। स्वास्थ्य और परिवार की स्थापित रीति को प्राथमिकता दें।

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