आदित्य पूजन महाराष्ट्र के अमांत श्रावण के प्रत्येक रविवार को होता है। 2026 के सभी रविवार इस पृष्ठ पर हैं; भक्त सूर्योदय पर सूर्य को आदित्य रूप में प्रार्थना, सुरक्षित जल-अर्घ्य और खीर जैसे पारिवारिक नैवेद्य से पूजते हैं।
2026 की तिथियाँ
एक मासिक व्रत — इस वर्ष इसकी तिथियाँ यहाँ दी गई हैं।
भारत (IST) के लिए सटीक पंचांग गणना। दूर पूर्व या पश्चिम के स्थानों पर तिथि एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।
श्रावण में आदित्य पूजन का अर्थ
रविवार परंपरागत रूप से सूर्य को समर्पित है, जिनकी यहाँ आदित्य रूप में पूजा होती है। महाराष्ट्र के श्रावण-क्रम में महीने के हर रविवार को आदित्य पूजन आता है और सप्ताह के बाकी दिनों की घरेलू उपासनाओं के साथ यह क्रम पूरा करता है।
उपासना में सुबह के सूर्य को प्रकाश और दैनिक लय के प्रत्यक्ष स्रोत के रूप में स्मरण किया जाता है। सूर्योदय की प्रार्थना और जल-अर्घ्य सूर्य पूजा के सामान्य रूप हैं। मराठी परंपरा विशेष रूप से श्रावण रविवार को खीर के नैवेद्य का उल्लेख करती है, हालांकि घर के अनुसार विधि और पकवान बदलते हैं।
यह भक्तिपूर्ण अनुष्ठान है, सूर्य को लगातार देखने की सलाह या स्वास्थ्य-लाभ की गारंटी नहीं। यह पृष्ठ महाराष्ट्र के अमांत श्रावण को मानता है, जिसकी नागरिक तिथि-सीमा उत्तर भारतीय पूर्णिमांत सावन से अलग हो सकती है।
अनुष्ठान एवं परंपरा
आदित्य पूजन सामान्यतः सूर्योदय के आसपास शुरू होता है। पूजा सरल रखें, सूर्य को सीधे न देखें और मौसम, स्थान तथा परिवार की रीति के अनुसार करें।
स्नान और सुबह की तैयारी: भक्त शुद्ध होकर दीप, फूल, जल और नैवेद्य घर के देवस्थान में रखते हैं।
उगते सूर्य का अभिवादन: सुबह के प्रकाश की ओर मुख करके प्रार्थना की जाती है, पर आँखों की सुरक्षा के लिए सूर्य को लगातार सीधे नहीं देखा जाता।
परंपरा हो तो जल-अर्घ्य: सुरक्षित खुले स्थान पर तांबे या किसी स्वच्छ पात्र से सावधानी से जल अर्पित किया जाता है ताकि फिसलन या अनावश्यक जल-बर्बादी न हो।
आदित्य प्रार्थना: क्षमता और परंपरा के अनुसार सूर्य के नाम, आदित्य हृदय स्तोत्र या छोटी घरेलू प्रार्थना पढ़ी जा सकती है।
खीर का नैवेद्य और प्रसाद: महाराष्ट्र की परंपरा श्रावण रविवार को खीर अर्पित करने का उल्लेख करती है; पूजा के बाद उसे प्रसाद रूप में बाँटा जाता है।
क्षेत्रीय विविधताएँ
महाराष्ट्र (अमांत श्रावण)
अमांत श्रावण के हर रविवार को आदित्य की पूजा होती है और पुराने मराठी वर्णनों में खीर का नैवेद्य विशेष रूप से बताया गया है।
भारत की व्यापक सूर्य-उपासना
सूर्योदय की प्रार्थना और सूर्य को अर्घ्य भारत भर में मिलते हैं, लेकिन श्रावण-रविवार की श्रृंखला और उसके भोजन-नियम को स्थानीय कैलेंडर के संदर्भ में समझना चाहिए।
यह तिथि कैसे निर्धारित होती है
यह पर्व चंद्र पंचांग के अनुसार श्रावण के संयोग पर निर्धारित होता है।
तिथियाँ NASA/JPL की खगोलीय गणना से निकाली जाती हैं और पारंपरिक पंचांग के अनुरूप होती हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
2026 में आदित्य पूजन की तिथियाँ कब हैं?
आदित्य पूजन महाराष्ट्र के अमांत श्रावण में आने वाले प्रत्येक रविवार को होता है। 2026 की पूरी सूची इस पृष्ठ के तिथि-भाग में है।
आदित्य पूजन में किसकी पूजा होती है?
सूर्य देव की आदित्य रूप में पूजा होती है। रविवार परंपरागत रूप से सूर्य से जुड़ा वार है।
श्रावण रविवार को क्या अर्पित किया जाता है?
प्रार्थना, दीप, फूल और सुरक्षित जल-अर्घ्य सामान्य हैं। मराठी परंपरा में खीर का नैवेद्य भी मिलता है, जबकि सामग्री और विधि घर के अनुसार बदलती है।
क्या पूजा में सूर्य को सीधे देखना सुरक्षित है?
सूर्य को लगातार सीधे नहीं देखना चाहिए। प्रार्थना और जल-अर्घ्य के लिए असुरक्षित दृष्टि आवश्यक नहीं है; आँखों की सुरक्षा सबसे पहले है।
आदित्य पूजन की कई तिथियाँ क्यों दिखाई जाती हैं?
यह एक दिन का वार्षिक त्योहार नहीं बल्कि श्रावण की साप्ताहिक पूजा है। महाराष्ट्र के अमांत श्रावण में आने वाला हर रविवार इसमें शामिल है।