इस माह के त्योहार और व्रत
सभी 6 देखें →Dashami
Ekadashi
Dwadashi
Indira Ekadashi
Trayodashi
Chaturdashi
Krishna Pradosh Vrat
Masik Shivaratri
Amavasya
Pratipada
Amavasya
Dwitiya
Tritiya
Hartalika Teej
Chaturthi
Vinayaka Chaturthi
Ganesh Chaturthi
Panchami
Rishi Panchami
Shashthi
Balarama Jayanti
Ashtami
Navami
Radha Ashtami
Dashami
Ekadashi
Dwadashi
Parsva Ekadashi
Kanya Sankranti
Trayodashi
Chaturdashi
Anant Chaturdashi
Purnima
Purnima Vrat
Pratipada
Pitrupaksha
Dwitiya
Tritiya
Chaturthi
Panchami
Sankashti Chaturthi
Shashthi
Saptami
Saptami
Ashtami
Navami
📖 तमिल कैलेंडर के बारे में
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
तमिल कैलेंडर हिन्दू अमान्त/पूर्णिमान्त कैलेंडर से कैसे भिन्न है?
मूल अन्तर सौर और चन्द्र का है। तमिल मास सूर्य की राशि के अनुसार नामित होते हैं — चित्तिरै वह माह है जब सूर्य मेष में होता है, वैकासि जब वृषभ में, और आगे भी इसी क्रम में। मास की सीमा संक्रान्ति-क्षण है, इसलिए तमिल मास ग्रेगोरियन कैलेंडर पर प्रायः स्थिर रहते हैं। हिन्दू चन्द्र कैलेंडर में मास उस नक्षत्र के आधार पर नामित होता है जिसके पास पूर्णिमा पड़ती है — चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ — और प्रतिवर्ष लगभग ग्यारह दिन पीछे खिसकता है, जिसे अधिक मास द्वारा समायोजित किया जाता है। दीपावली तमिल परम्परा में ऐप्पसि माह की कार्तिका अमावस्या को पड़ती है — वही तिथि जो उत्तर भारत में कार्तिक अमावस्या है, बस माह का नाम तमिल में अलग है। तिथि गणना दोनों में समान रहती है; केवल माह-नामकरण का ढाँचा बदलता है।
वर्तमान तमिल वर्ष क्या है और यह कब बदलता है?
वर्तमान तमिल वर्ष विश्वावसु है, जो 14 अप्रैल 2026 को मेष संक्रान्ति पर आरम्भ हुआ। तमिल वर्ष साठ संस्कृत नामों के चक्र में चलते हैं — प्रभव, विभव, शुक्ल, प्रमोद, प्रजापति, अंगिरस, श्रीमुख … सभी साठ नाम, फिर पुनः प्रभव से। विश्वावसु इस क्रम में बयालीसवाँ नाम है। 14 अप्रैल 2027 को यह परभव वर्ष बन जाएगा। इससे पहले विश्वावसु 1965-1966 में था; अगली बार 2086-2087 में होगा। यह साठ-वर्षीय चक्र विक्रम संवत से सर्वथा भिन्न है — विक्रम संवत सतत संख्या में गिना जाता है, नामों के चक्र में नहीं।
थिरु गणित क्या है और यह कैलेंडर इसे क्यों उपयोग करता है?
थिरु गणित (Thiru Ganita, तमिल में 'थिरुगणितम्') आधुनिक दृक्-गणना पद्धति है जो सूर्य और चन्द्रमा की वास्तविक कक्षीय स्थितियों से तिथि, नक्षत्र, सूर्योदय और संक्रान्ति की गणना करती है — वैसे ही जैसे खगोलशास्त्रीय सॉफ़्टवेयर करता है। यह परिणाम आकाश में वास्तव में दिखने वाली स्थिति से मेल खाता है। पुरानी वाक्य पद्धति (Vakyam) पाण्डुलिपि परम्परा में चले आ रहे सारणीबद्ध अनुमान-मानों का उपयोग करती है — सामान्यतः सटीक, परन्तु सूर्योदय और नक्षत्र-संक्रमण के समय में कुछ मिनट का अन्तर देती है। चेन्नई, मदुरै, पॉण्डिचेरी और कोयम्बटूर के अधिकांश छपे पंचांग और drikpanchang जैसे ऑनलाइन स्रोत थिरु गणित + लाहिरी अयनांश का उपयोग करते हैं। यह ऐप भी वही पद्धति अपनाता है। यदि आपके परिवार का पंचांग किसी विशेष मठ का वाक्य-परम्परा वाला हो, तो नक्षत्र-संक्रमण के निकट कभी-कभी एक दिन का अन्तर सम्भव है।
मार्गझि माह क्या है और वह इतना विशेष क्यों है?
मार्गझि तमिल सौर माह है जो मध्य दिसम्बर से मध्य जनवरी तक चलता है — सूर्य के धनु राशि में रहने का समय। यह तमिल वैष्णव और शैव परम्परा का सर्वाधिक गहन भक्ति-माह है। वैष्णव मंदिरों में प्रातः 4 बजे से तिरुप्पावै पाठ होता है — आण्डाल के तीस छन्द मास भर प्रतिदिन गाए जाते हैं। श्रीरंगम के रंगनाथस्वामी मंदिर और पार्थसारथी मंदिर (तिरुवल्लिक्केणि, चेन्नई) में वैकुण्ठ एकादशी पर परमपद वासल (वैकुण्ठ का द्वार) खोला जाता है — यह तमिल वैष्णव वर्ष का सबसे बड़ा आयोजन है। मार्गझि में मद्रास म्यूजिक सीज़न — कर्नाटक संगीत के सभाओं में सैकड़ों संगीत कार्यक्रम — भी होता है। तमिल परम्परा में मार्गझि में विवाह और शुभ आयोजन नहीं होते। इस माह का सूर्योदय वर्ष में सबसे देर से होता है, इसीलिए प्रातः 4-6 बजे के भक्ति कार्यक्रम नियमित रूप से भरे रहते हैं।
पोंगल कब है और वह क्या मनाता है?
पोंगल थाई 1 को — तमिल सौर माह थाई के प्रथम दिन — मनाया जाता है, जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है। यह खगोलीय दृष्टि से वही क्षण है जिसे उत्तर भारत में मकर संक्रान्ति कहते हैं। तिथि सामान्यतः 14 जनवरी होती है। तमिल परम्परा चार दिन मनाती है: भोगी पोंगल (पुरानी वस्तुओं को जलाना), थाई पोंगल (मुख्य दिन — खुले बर्तन में चावल पकाना, जो सूर्योदय पर उबलकर बाहर आए — शुभ क्षण), मट्टु पोंगल (गाय-बैल पूजा, कृषि-कर्म की कृतज्ञता), और कानुम पोंगल (परिवार मिलन, नदी-भ्रमण)। पोंगल के बर्तन उबलने का सटीक सूर्योदय-मुहूर्त प्रत्येक नगर के लिए अलग-अलग तमिल पंचांग में प्रकाशित होता है — यह पृष्ठ आपके सहेजे गए शहर के अनुसार वह समय दर्शाता है।
मैं इस कैलेंडर को अपने परिवार के छपे तमिल पंचांग के साथ कैसे मिलाऊँ?
यह पृष्ठ थिरु गणित + लाहिरी अयनांश से गणना करता है — वही आधार जो drikpanchang.com और चेन्नई, मदुरै, कोयम्बटूर, पॉण्डिचेरी के अधिकांश समकालीन छपे पंचांगों में है। दैनिक तिथि और नक्षत्र-संक्रमण का समय आपके शहर के सूर्योदय पर निर्भर करता है — अपने परिवार के मूल शहर को लोकेशन बार में बदलें। त्योहार की तिथियाँ लगभग सभी दिनों पर आपके पंचांग से मिलेंगी। यदि आपका परिवार किसी विशेष मठ की वाक्य-परम्परा के पंचांग का अनुसरण करता है — जो थंजावुर क्षेत्र की कुछ परिवारों में प्रचलित है — तो नक्षत्र-संक्रमण के निकट कभी-कभी एक दिन का अन्तर सम्भव है; यह दोनों पद्धतियों का स्वाभाविक अन्तर है, किसी में त्रुटि नहीं।