इस माह के त्योहार और व्रत
सभी 10 देखें →Pratipada
Dwitiya
Tritiya
Chaturthi
Sakat Chauth
Sankashti Chaturthi
Panchami
Shashthi
Saptami
Ashtami
Navami
Dashami
Ekadashi
Vijaya Ekadashi
Dwadashi
Trayodashi
Krishna Pradosh Vrat
Masik Shivaratri
Chaturdashi
Pratipada
Makar Sankranti
Thai Pongal
Dwitiya
Makar Sankranti
Thai Pongal
Tritiya
Makar Sankranti
Thai Pongal
Chaturthi
Makar Sankranti
Thai Pongal
+1 और
Panchami
Makar Sankranti
Thai Pongal
+1 और
Shashthi
Saptami
Ratha Saptami
Ashtami
Bhishma Ashtami
Navami
Navami
Dashami
Ekadashi
Republic Day
Jaya Ekadashi
Dwadashi
Trayodashi
Shukla Pradosh Vrat
Chaturdashi
Purnima
Purnima Vrat
Pratipada
📖 गुजराती कैलेंडर के बारे में
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गुजराती विक्रम संवत वर्ष कुछ महीनों के लिए हिन्दू पृष्ठ के VS से एक कम क्यों होता है?
दोनों पृष्ठ विक्रम संवत उपयोग करते हैं, लेकिन वर्ष बदलने की तिथि भिन्न है। हिन्दू (सामान्य उत्तर भारतीय) VS चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर बदलता है — मार्च के अन्त या अप्रैल की शुरुआत में। गुजराती VS बेस्तु वरस पर बदलता है — कारतक शुक्ल प्रतिपदा, दीपावली के अगले दिन, अक्टूबर-नवम्बर में। मई 2026 में हिन्दू पृष्ठ VS 2083 दिखाता है (मार्च 2026 में बदला); गुजराती पृष्ठ VS 2082 दिखाता है (नवम्बर 2026 में बदलेगा)। नवम्बर 2026 के बाद दोनों VS 2083 हो जाएँगे। यह अन्तर हर साल अप्रैल से नवम्बर के बीच रहता है — दोनों परम्पराएँ अपनी जगह सही हैं।
बेस्तु वरस क्या है और कब होता है?
बेस्तु वरस गुजराती नव वर्ष है — कारतक शुक्ल प्रतिपदा, दीपावली के ठीक अगले दिन। यह अक्टूबर के अन्त या नवम्बर के मध्य में पड़ता है। व्यापारी दीपावली की शाम चोपड़ा पूजा में नए खाते की बहियाँ मंदिर में आशीर्वाद दिलाते हैं, फिर बेस्तु वरस की सुबह नए वर्ष की पहली बिक्री या लेनदेन के साथ शुभारम्भ करते हैं। परिवार नए वस्त्र पहनते हैं, कुलदेवता के दर्शन करते हैं, और उपहारों का आदान-प्रदान होता है। गुजराती विक्रम संवत इसी दिन एक अंक बढ़ता है। यह हिन्दू गुड़ी पड़वा (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, मार्च-अप्रैल) से बिल्कुल अलग है — दोनों VS नव वर्ष हैं, लेकिन अलग-अलग तिथियों पर।
चोपड़ा पूजा क्या है?
चोपड़ा पूजा गुजराती व्यापारियों का दीपावली-दिन का खाता-बही आशीर्वाद संस्कार है। दीपावली के दिन (आसो कृष्ण अमावस्या) व्यापारी नए बही-खाते (चोपड़े) मंदिर लाते हैं — अहमदाबाद में कालूपुर स्वामीनारायण मंदिर और गुजरात भर के वैष्णव मंदिरों में — जहाँ देवी लक्ष्मी के समक्ष पुस्तकें रखकर विधिवत पूजा होती है। अगले दिन बेस्तु वरस पर आशीर्वादित बही खोली जाती है और वर्ष का पहला लेनदेन दर्ज होता है। आधुनिक व्यापारिक प्रतिष्ठान भी सांकेतिक रूप से एक भौतिक चोपड़ा रखते हैं — डिजिटल अकाउंटिंग के साथ-साथ।
गुजरात में नवरात्रि कैसे मनाई जाती है?
नवरात्रि (आसो शुक्ल प्रतिपदा से नवमी, सितम्बर-अक्टूबर) गुजराती वर्ष का सांस्कृतिक शिखर है — नौ रातें गरबा (मिट्टी के दीपक के चारों ओर वृत्ताकार लोक-नृत्य) और डांडिया रास (डंडियों के साथ युगल-नृत्य) का उत्सव। अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत और मुम्बई के गुजराती मुहल्लों में विशाल सार्वजनिक पंडाल लगते हैं जो मध्यरात्रि के बाद तक चलते हैं। महिलाएँ चणिया चोली (कढ़ाईदार घाघरा-चोली) और पुरुष केड़ियु (पारम्परिक कुर्ता) पहनते हैं। माँ दुर्गा / अम्बा के नौ रूपों की आराधना प्रतिदिन सन्ध्याकाल में होती है। दशहरे (आसो शुक्ल दशमी) पर नवरात्रि का समापन होता है।
इस कैलेंडर में 'भादरवो' क्यों लिखा है, जबकि हिन्दू पृष्ठ पर 'भाद्रपद' है?
गुजराती उसी अमान्त चान्द्र मास के लिए क्षेत्रीय नामों का उपयोग करता है: भादरवो = भाद्रपद, आसो = आश्विन, कारतक = कार्तिक, मागसर = मार्गशीर्ष, पोस = पौष, महा = माघ, फागण = फाल्गुन, वैशाख = वैशाख, जेठ = ज्येष्ठ, आषाढ़ = आषाढ, श्रावण = श्रावण। खगोलीय मास एक ही है — वही अमावस्या सीमा, वही तिथियाँ। हिन्दू पृष्ठ पर अमान्त टॉगल चुनने पर वही दिन संस्कृत माह-नामों में दिखेंगे।
अक्षय तृतीया (अक्षय त्रिज) गुजरातियों के लिए इतनी महत्त्वपूर्ण क्यों है?
अक्षय त्रिज (अक्षया तृतीया, वैशाख शुक्ल तृतीया, अप्रैल-मई) चार 'अक्षय' दिनों में से एक है जो स्वयंसिद्ध शुभ माने जाते हैं — अर्थात् इस दिन अलग से मुहूर्त निकालने की आवश्यकता नहीं। गुजराती ज्वैलरी शोरूम इस दिन साल की सबसे बड़ी बिक्री करते हैं; यह विश्वास है कि इस दिन खरीदा गया सोना अक्षय (अविनाशी) समृद्धि लाता है। कई गुजराती विवाह और गृह प्रवेश भी इसी दिन रखे जाते हैं। जैन गुजराती इसे अखा त्रिज के रूप में भी मनाते हैं — पहले जैन तीर्थंकर ऋषभनाथ के दीर्घ उपवास समाप्ति की स्मृति में।