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लाल किताब में राहु

लाल किताब में राहु महत्वाकांक्षा, विदेश और अदृश्य का प्रतीक है: जो परिचित से परे है उसकी ओर खिंचाव। इसे राशि से नहीं, बल्कि भाव से देखा जाता है, इसलिए इसका असर इस पर निर्भर करता है कि यह आपकी कुंडली में किस भाव में बैठा है। इसके उपाय सरल और कम खर्च के रोज़मर्रा के काम हैं (काले तिल और कंबल दान करना, चांदी रखना), रत्न कभी नहीं।

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लाल किताब में राहु का क्या अर्थ है

लाल किताब राहु को एक बेचैन, बढ़ाने वाली शक्ति बताती है: यह जिस चीज़ को छूता है उसे और बड़ा कर देता है, और मन को दूर की, छिपी हुई तथा अनिश्चित बातों की ओर खींचता है। अच्छी स्थिति में यह ध्यान को पैना कर सकता है और सामान्य सीमाओं से आगे बढ़ने में मदद कर सकता है। कमज़ोर स्थिति में यह धुंध, झूठे डर या बिखरी महत्वाकांक्षा जैसा लगता है, जहाँ मन जितना संभाल सके उससे अधिक के पीछे भागता है। यह संभालने का क्षेत्र है, कोई फैसला नहीं।

राहु की भाव-अनुसार गरिमा

पक्का घर (स्थायी घर):
भाव 12
उच्च:
भाव 6
नीच (मज़बूत करने योग्य क्षेत्र):
भाव 12

पक्का घर एक संरचनात्मक घर है, स्वतः शुभ नहीं। नीच स्थिति केवल मज़बूत करने योग्य क्षेत्र है, और लाल किताब में यह प्रायः कुंडली की सबसे सुधारने योग्य चीज़ होती है।

लाल किताब में राहु के सामान्य उपाय

राहु के उपाय दिन के उजाले में, शांत मन से किए जाने वाले सीधे-सादे काम हैं। ज़रूरतमंदों को काले तिल और गर्म कंबल दान करें (जहाँ सुरक्षित और कानूनी हो), और मन की शांति के लिए अपने पास चांदी का एक टुकड़ा रखें। नशे से दूर रहें, जो राहु की बेचैनी को और बढ़ाते हैं। लाल किताब में काम के पीछे की भावना उतनी ही मायने रखती है जितना काम स्वयं: स्थिर और ईमानदार आचरण ही असली उपाय है।

उपाय तब लागू होते हैं जब यह ग्रह आपकी अपनी कुंडली में निर्बल पढ़ा जाए। ये सौम्य रोज़मर्रा के कार्य हैं, कभी रत्न नहीं, और किसी परिणाम की गारंटी नहीं।

राहु से जुड़ी चिंताएँ

लाल किताब में राहु बेचैनी, कच्ची महत्वाकांक्षा और भ्रम को संचालित करता है: पैरों तले स्पष्ट ज़मीन के बिना अधिक पाने की चाह। इसका कोई एक तय भाव-संबंधी विषय नहीं है। इसके उपाय सफलता के शॉर्टकट नहीं हैं; ये स्थिरता और स्पष्टता लाकर काम करते हैं, ताकि महत्वाकांक्षा को टिकने के लिए शांत आधार मिल सके।

सामान्य प्रश्न

क्या लाल किताब में राहु हमेशा बुरा या हमेशा अच्छा होता है?

कोई भी नहीं। राहु कुछ भावों में मज़बूत और कुछ में अस्थिर होता है, और लाल किताब कमज़ोर स्थिति को बस जीवन का एक ऐसा क्षेत्र मानती है जिसे मज़बूत करना है, कोई तय भाग्य नहीं। दरअसल यह अक्सर कुंडली में सबसे आसानी से संभलने वाली चीज़ होती है, क्योंकि इसके उपाय सरल रोज़मर्रा के काम हैं जो कोई भी कर सकता है।

राहु के लिए लाल किताब में कौन सा रत्न पहनना चाहिए?

लाल किताब किसी भी ग्रह के लिए रत्न का प्रयोग नहीं करती, राहु के लिए भी नहीं। इसके बजाय यह सरल रोज़मर्रा के काम बताती है: काले तिल और कंबल दान करें, चांदी का एक टुकड़ा अपने पास रखें, और नशे से दूर रहें। उपाय आचरण और दान है, कोई रत्न नहीं।

लाल किताब में राहु कहाँ मज़बूत या कमज़ोर माना जाता है?

लाल किताब के भावों के अनुसार राहु का पक्का घर (इसका स्थायी घर) 12वां भाव है, और यह 6ठे भाव में उच्च का होता है। यह 12वें भाव में कमज़ोर (नीच) माना जाता है। इन्हें राशि से नहीं, भाव की स्थिति से देखा जाता है, इसलिए देखें कि आपकी अपनी कुंडली में राहु किस भाव में है।

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विद्या पं. बी.एम. गोस्वामी के अंग्रेज़ी संस्करण (1952) पर आधारित है, जो पंडित रूप चंद जोशी की लाल किताब का है। ग्रहों की स्थिति हमारे अपने इंजन द्वारा NASA/JPL ephemeris से गणना की जाती है।